- मामला खुला तो रसीद को किया निरस्त, अधिकारी बोले तकनीकी खामी के चलते हुआ ऐसा - अजमेर की पिंकपे इंफॉटेक कॉम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा मामला
Bhilwara news : बिजली का बिल जमा करने वाले अजमेर की एजेंसी राशि को सरकारी खजाने में जमा न करके अपने काम में ले रही है। इसके चलते बिजली का बिल जमा होने के बाद भी उपभोक्ता को नए बिल में पुरानी राशि पेनल्टी समेत जोड़कर या संबन्ध विच्छेद करने के नोटिस जारी किए जा रहे है। इससे उपभोक्ताओं के होश उड़ने के साथ ई-मित्र संचालकों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। इसकी जानकारी जब उच्च अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने आनन-फानन में जमा की गई राशि को पुन: ई-मित्र के खाते में ट्रांसफर करके मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया।
थर्ड पार्टी पोर्टल का मामला
आरके कॉलोनी छोटी पुलिया स्थित कियोस्क सेंटर पर 9 दिसंबर 2024 को नानी बाई के नाम से बिजली का बिल जमा कराने उपभोक्ता आया। कियोस्क संचालक ने थर्ड पार्टी पोर्टल पिंकपे इंफॉटेक कॉम प्राइवेट लिमिटेड अजमेर के नाम से 3138 रुपए जमा कर रसीद उपभोक्ता को दे दी। उपभोक्ता भी रसीद लेकर घर चला गया। इसी उपभोक्ता के अगला बिल आया तो उसमें पेनल्टी लगकर यही राशि पुन: जुड़ कर आ गई। साथ में राशि 15 दिन में जमा न कराने पर विद्युत संबंध विच्छेद करने का नोटिस भी जारी कर दिया। उपभोक्ता यह बिल लेकर कियोस्क संचालक के पास गया तथा उससे झगड़ा करने लगा।
शिकायत की तो जमा बिल को किया निरस्त
संचालक मनीष चेचानी ने बताया कि जब उसने रसीद की जांच की तो 9 दिसंबर को राशि जमा थी। चेचानी ने सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग में कार्यरत निरंजन तथा अजमेर के पिंकपे इंफटेक कॉम प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक दिनेश को सूचना दी। दिनेश ने मेल पर जानकारी देने को कहा। मेल करने पर अजमेर से दिनेश ने मनीष चेचानी को फोन करके बिल, संबंध विच्छेद आर्डर एवं नया बिल भेजने को कहा। दिनेश ने यह सभी कागज मिलने के बाद उस राशि को जमा करने के बजाए गुरुवार दोपहर 3.37 बजे पुन: चेचानी को मेल भेज कर जमा बिल को निरस्त करने की सूचना दी तथा जमा राशि चेचानी के ईमित्र कियोस्क के वॉलेट में जमा कर दी। साथ ही मामले को रफा-दफा करने के लिए जोर डालने लगा।
तकनीकी कारणों से हो गया ऐसा
इस मामले में जब पत्रिका ने सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के अधिकारी निरंजन से सम्पर्क किया तो उन्होंने उच्च अधिकारी पवन नानकानी से संपर्क करने को कहा। नानकानी से जानकारी चाही तो उनका कहना था कि यह कोई तकनीकी कारणों से ऐसा हो गया है।