तिल के लड्डुओं में विटामिन ई व एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को चमकदार और बालों को स्वस्थ बनाते हैं
Bhilwara news : सर्दियां आते ही लोगों की भोजन की रुचि बदल जाती है। आम तौर पर स्थानीय उत्पाद से बनने वाले पकवान गांव देहात से लेकर शहर के घरों की रसोई तक में महकने लगते हैं। तिल से बनने वाले लड्डू तथा तिल पापड़ी बनाने की महक राह चलते आ जाती है। शहर में अच्छी गुणवत्ता के तिल होने से यहां तिल से बने उत्पाद घरों में परंपरागत रूप से बनाए जाते हैं। इन्हें बनाने में अधिक सामग्री भी नहीं लगती है। तिल और गुड़ के मिश्रण से लड्डू तैयार होता है। तिल की फसल पर किसी प्रकार की दवा का छिड़काव नहीं किया जाता है, इसलिए पूरी तरह निरोगी होता है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे खनिज पाए जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। सर्दियों में हड्डियों की सेहत के लिए यह बेहतरीन खाद्य पदार्थ है। तिल के लड्डुओं में मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को चमकदार और बालों को स्वस्थ बनाए रखते हैं। यह त्वचा को सर्दियों में ड्राई होने से बचाता है। साथ ही ऊर्जा बढ़ाने, पाचन को सुधार और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी तिल के लड्डू बेहतरीन स्रोत हैं।
पौष्टिक तत्वों से भरपूर
तिल के लड्डू पौष्टिक तत्वों से भरपूर होते हैं, इन्हें बनाने के लिए सामान्य तौर पर दो विधियां काम में ली जाती है। एक विधि में सबसे पहले तिल को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा और खुशबूदार होने तक भून लेते हैं। भूनने के बाद तिल को बर्तन में निकालकर ठंडा होने के लिए रखते हैं। फिर एक कड़ाही में गुड़ और उसके अनुपात में पानी डालकर धीमी आंच पर गुड़ को पिघलाते हैं। गुड़ को गाढ़ा होने तक पकाते रहते हैं। गुड़ एक तार बन जाए तो पिघले हुए गुड़ में भुने हुए तिल डाल देते हैं और अच्छी तरह से मिला लेते हैं। मिश्रण थोड़ा ठंडा हो जाए तो इनके लड्डू बनाते हैं। दूसरी विधि में गुड़ और तिल को एक साथ ही गर्म करते हैं तिल भूनते रहते हैं और गुड़ गर्म होकर पिघल जाता है। दोनों को साथ-साथ गर्म करते हैं। तिल के पकने की खुशबू आने तथा उसके रंग भूरा होने तक भूनते हैं। तब तक गुड़ भी पिघलकर तरल रूप में आ जाता है। इस मिश्रण को हल्का ठंडा होने पर लड्डू बना देते हैं। आजकल ईलायची का पाऊडर, बादाम, काजू या पिस्ता जैसे मेवे भी मिलाए जाने लगे हैं।