भीलवाड़ा

बजट घोषणाओं के ‘कांटों’ में उलझा भीलवाड़ा का मिनी फूड पार्क

- घोषणा के 3 साल बाद भी सिडियास में 100 बीघा जमीन पर सिर्फ 4 पत्थर - न लीज डीड बनी, न बाउंड्री वॉल को मिली मंजूरी

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Jan 19, 2026
Bhilwara's mini food park is entangled in the 'thorns' of budget announcements.

मुख्यमंत्री की बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने में सरकारी कछुआ चाल किस कदर आड़े आती है, इसका जीवंत उदाहरण मांडल का मिनी फूड पार्क है। वर्ष 2022-23 के बजट में घोषित यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तीन साल बाद भी कागजी फाइलों और विभागीय पत्राचार के बीच दम तोड़ रहा है। आलम यह है कि मांडल तहसील के ग्राम सिडियास में आवंटित 100 बीघा बेशकीमती जमीन पर अब तक महज चार कोने पर पत्थर ही लग पाए हैं। न तो जमीन की लीज डीड तैयार हुई है और न ही इसकी सुरक्षा के लिए तारबंदी (वायर फेंसिंग) का काम शुरू हो सका है।

फाइलों में कैद सुरक्षा की मंजूरी

प्रशासनिक शिथिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंडी समिति ने जमीन पर वायर फेंसिंग के लिए अधिशाषी अभियंता से एस्टीमेट (तकमीना) और बजट प्रपत्र तैयार करवाकर 31 अगस्त 2022 और फिर 25 नवंबर 2022 को ही निदेशालय भेज दिए थे। हद तो तब हो गई जब हाल ही में 4 जून 2025 को पुनः पत्र लिखकर चारदीवारी की स्वीकृति मांगी गई, लेकिन जयपुर स्थित कृषि विपणन निदेशालय से अब तक "हरी झंडी" का इंतजार है। स्वीकृति के अभाव में करोड़ों की जमीन लावारिस पड़ी है।

डीपीआर तैयार, पर एक्शन प्लान का 'अकाल'

हैरानी की बात यह है कि मिनी फूड पार्क की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तो विभाग को मिल चुकी है, लेकिन मौके पर काम शुरू करने के लिए आवश्यक 'एक्शन प्लान' अब तक तैयार नहीं किया गया है। विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि यहां किस तरह के और कितने उद्योग लगाए जाएंगे। ऐसे में 'राइजिंग राजस्थान' जैसे आयोजनों में निवेश की इच्छा जताने वाले उद्यमियों को भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। निवेशक भूखंड आवंटन की मांग कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर बुनियादी ढांचा शून्य है।

इनका कहना है...

निदेशालय को चारदीवारी की स्वीकृति के लिए पत्राचार किया गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही तारबंदी या चारदीवारी का काम शुरू होगा। इसके बाद एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी।

- मदनलाल सैनी, सचिव, कृषि उपज मंडी भीलवाड़ा

पत्रिका व्यू: करोड़ों का निवेश और रोजगार दांव पर

सिडियास में प्रस्तावित इस मिनी फूड पार्क से जिले में कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों का जाल बिछना था। इससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलता और युवाओं को रोजगार। लेकिन अफसरों की लेटलतीफी ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। जब तक बाउंड्री वॉल और एक्शन प्लान नहीं बनता, तब तक निवेशकों को आकर्षित करना नामुमकिन है।

Published on:
19 Jan 2026 09:24 am
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