राज्य सरकार ने प्रदेश के खनन पट्टाधारियों को बड़ी राहत देते हुए ‘एकमुश्त समाधान योजना’ के तहत ड्रोन सर्वे रिपोर्ट जमा कराने और बकाया राशि चुकाने की समय सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। संयुक्त शासन सचिव अरविन्द सारस्वत की ओर से […]
राज्य सरकार ने प्रदेश के खनन पट्टाधारियों को बड़ी राहत देते हुए 'एकमुश्त समाधान योजना' के तहत ड्रोन सर्वे रिपोर्ट जमा कराने और बकाया राशि चुकाने की समय सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
संयुक्त शासन सचिव अरविन्द सारस्वत की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब खनन पट्टाधारी अपने क्षेत्र का ड्रोन सर्वे करवाकर 31 मार्च 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकेंगे। पहले यह समय सीमा 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी।
बजट घोषणा 2024-25 की पालना में वॉल्यूमेट्रिक असेसमेंट के लिए ड्रोन सर्वे अनिवार्य किया गया था। लेकिन गृह मंत्रालय के आदेश पर बीच में ड्रोन उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी। 1 अक्टूबर 2025 से नागरिक ड्रोन परिचालन पर प्रतिबंध हटने के बाद खान एवं भू-विज्ञान निदेशालय उदयपुर ने समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एकमुश्त समाधान योजना के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तिथि' को आरएमएमसीआर, 2017 की द्वितीय अनुसूची में प्रभावी रॉयल्टी दर प्रतिस्थापित किया जाएगा। यह प्रावधान 1 जुलाई 2025 की जगह लागू होगा।
इस आदेश के बाद भीलवाड़ा खनिज विभाग की ओर से हाल में कराए गए ड्रोन सर्वे को लेकर खनन पट्टाधारियों ने रोष व्यक्त किया था। इसे लेकर तुलसी दास बहरवानी ने राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली थी। इस पर न्यायालय ने राहत देते हुए पुन: ड्रोन सर्वे करवाने के निर्देश दिए है। इस आदेश के बाद सात अन्य लीज धारक भी न्यायालय की शरण में गए हैं।
विभाग ने पुरानी तारीखों को संशोधित करते हुए नई समय सारिणी जारी की है
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