राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर के एक कड़े फैसले के बाद जिले में बजरी खनन को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट के बजरी के नीलाम किए गए ब्लॉक व प्लांट रद्द करने के आदेश की पालना में खनिज विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। खनन विभाग ने जिले की पांच महत्वपूर्ण बजरी […]
राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर के एक कड़े फैसले के बाद जिले में बजरी खनन को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट के बजरी के नीलाम किए गए ब्लॉक व प्लांट रद्द करने के आदेश की पालना में खनिज विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। खनन विभाग ने जिले की पांच महत्वपूर्ण बजरी लीज को मंगलवार रात 12 बजे से तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है। इस कार्रवाई के बाद जिले में बनास की बजरी की किल्लत हो गई है।
अधीक्षण खनि अभियंता (वृत्त-भीलवाड़ा) ओपी काबरा ने बताया कि डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान की याचिका पर न्यायालय ने 20 जनवरी को फैसला सुनाया था। इसी क्रम में खनिज अभियन्ता भीलवाड़ा से 27 जनवरी को प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर ई-नीलामी से आवंटित खनन पट्टा संख्या बीजे 07, 13, 15, 18 तथा 22 में खनन कार्य बंद करा दिया गया है। विभाग ने इन लीज के ई-रवन्ना और स्टॉक पॉइंट से जारी होने वाली ई-टीपी को पोर्टल पर डिएक्टिवेट कर दिया है। अब ये लीज धारक किसी भी तरह का ट्रांजिट पास जारी नहीं कर सकेंगे।
राहत की बात यह है कि जिले में पहले से संचालित चार अन्य बजरी लीज इस आदेश से अप्रभावित हैं। शाहपुरा, आसींद, रायपुर तथा सहाड़ा क्षेत्र में जो लीज पहले से चल रही हैं, वहां खनन कार्य यथावत जारी रहेगा। हालांकि, पांच बड़ी लीज के अचानक बंद होने से बाजार में बजरी की आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ना तय है।
हाईकोर्ट के आदेश की अक्षरश: पालना सुनिश्चित की गई है। 28 जनवरी से इन पांचों पट्टों से किसी भी प्रकार का परिवहन या निर्गमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
-ओपी काबरा, अधीक्षण खनि अभियंता, भीलवाड़ा
इन बजरी के खनन पट्टों पर लगी रोक