विमल नलवाया साधन सीमित हों लेकिन संकल्प हिमालय जैसा, तो बदलाव की इबारत लिखी ही जाती है। चित्तौड़गढ़ जिले के एक छोटे से गांव बिलोदा के पिता-पुत्र की जोड़ी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। भेरूलाल गाडरी और उनके पुत्र विजय कुमार ने न केवल मेवाड़ का मान बढ़ाया है, बल्कि इन्नोवेटिव […]
विमल नलवाया
साधन सीमित हों लेकिन संकल्प हिमालय जैसा, तो बदलाव की इबारत लिखी ही जाती है। चित्तौड़गढ़ जिले के एक छोटे से गांव बिलोदा के पिता-पुत्र की जोड़ी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। भेरूलाल गाडरी और उनके पुत्र विजय कुमार ने न केवल मेवाड़ का मान बढ़ाया है, बल्कि इन्नोवेटिव फार्मर्स के जरिए देश के 12 लाख किसानों के मोबाइल में डिजिटल क्रांति के बीज बो दिए हैं।
साल 2018 में जब यह सफर शुरू हुआ, तब पिता-पुत्र के पास संसाधनों के नाम पर कुछ नहीं था। न एडिटिंग के लिए कंप्यूटर था और न ही प्रोफेशनल माइक। उनके पास था तो सिर्फ अनुभव और किसानों का दर्द समझने वाला दिल। भेरूलाल बताते हैं कि उन्होंने एसी कमरों में बैठकर ज्ञान देने के बजाय जमीन पर उतरना चुना। अपनी पुरानी बाइक उठाई और निकल पड़े पंजाब, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान के धूल भरे रास्तों पर। दिनभर खेतों में तपते, वीडियो शूट करते और रात को मोबाइल पर ही उसे एडिट कर दुनिया के सामने रखते।
इनके वीडियो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि किसानों के लिए मुनाफे का मंत्र बन गए हैं।
मेवाड़ की इस जोड़ी की गूंज अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुकी है। भारत सरकार के नेशनल क्रिएटर्स अवार्ड-2024 में इन्हें मोस्ट इम्पैक्टफुल एग्रो यूट्यूबर श्रेणी में देशभर के टॉप-9 नॉमिनी में चुना गया। यह उपलब्धि बताती है कि डिजिटल इंडिया का असली चेहरा अब गांवों से उभर रहा है।
यह सम्मान हमारा नहीं, मेवाड़ की माटी और उस भरोसे का है जो देश के लाखों किसानों ने हम पर जताया है। - भेरूलाल गाडरी, इन्नोवेटिव फार्मर
विजय गाडरी अब अपने खेत को एक लाइव डेमो सेंटर में बदल रहे हैं। यहां दुनिया का सबसे महंगा मियाजाकी आम तो लहलहा ही रहा है, साथ ही कश्मीरी एप्पल बेर, गोल्डन सीताफल और वियतनाम माल्टा की किस्में भी तैयार हैं। इनका मकसद है कि किसान केवल वीडियो न देखें, बल्कि खेत पर आकर सीखें कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग से छोटी जोत में भी लखपति कैसे बना जा सकता है।