तीन साल बाद फिर 'अधिकमास' का संयोग, साल में होंगे 13 महीने
इस साल 2026 में शादियों की चमक और रौनक और अधिक बढ़ने वाली है। इस वर्ष विवाह के लिए कुल 63 शुभ मुहूर्त रहेंगे। हालांकि, साल की शुरुआत यानी जनवरी माह में शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण एक भी शुभ विवाह मुहूर्त नहीं है, लेकिन 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर होने वाले 'अबूझ मुहूर्त' में गृह प्रवेश और विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की धूम रहेगी। 4 फरवरी से विधिवत रूप से शादियों का सीजन शुरू होगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, विवाह का कारक माना जाने वाला शुक्र ग्रह जनवरी में अस्त रहेगा। पंडित अशोक व्यास ने बताया कि 2 फरवरी 2026 को शुक्र का उदय होगा। इसके बाद ही पंचांग में शुभ विवाह मुहूर्त की शुरुआत होगी। फरवरी में 7 दिन शुभ लग्न रहेंगे, जबकि मई में सर्वाधिक 11 दिन शहनाइयां गूंजेंगी।
वर्ष 2026 में सौर और चंद्र वर्ष के अंतर को संतुलित करने के लिए 'अधिकमास' (पुरुषोत्तम मास) का विशेष संयोग बन रहा है। इस कारण साल में 12 के स्थान पर 13 महीने होंगे। इस बार ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। प्रथम ज्येष्ठ 2 मई से 29 जून तक रहेगा। इसके मध्य में 17 मई से 15 जून तक अधिकमास की अवधि रहेगी। यह अतिरिक्त मास हर तीन साल में एक बार आता है। इससे मांगलिक कार्यों के लिए समय अधिक मिलता है।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इसके बाद अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में वैवाहिक कार्यों पर पूरी तरह विराम रहेगा। फिर 20 नवंबर को देव प्रबोधनी एकादशी पर देव जागने के साथ ही दोबारा शादियां शुरू होंगी।
सौर वर्ष 365 दिन का और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो तीन साल में बढ़कर 33 दिन हो जाता है। इसी अंतर को पाटने और ऋतुओं का तालमेल बैठाने के लिए ज्योतिष शास्त्र में हर तीसरे साल 'पुरुषोत्तम मास' यानी अधिकमास जोड़ा जाता है।
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि फरवरी में 7 दिन शुभ लग्न रहेंगे। मार्च में भी 7, अप्रेल में 8, मई में 11, जून में 9, जुलाई में 8, नवंबर में 7 और दिसंबर में 6 शुभ मुहूर्त रहेंगे।