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फसलों की पैदावार का वैज्ञानिक आकलन शुरू: पारदर्शी रिपोर्ट से मिलेगा किसानों को फसल बीमा का पूरा हक

Transparent reporting will ensure farmers get full rights to crop insurance

Transparent reporting will ensure farmers get full rights to crop insurance

भीलवाड़ा जिले के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा और पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए कृषि विभाग ने जमीनी स्तर पर कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में पुर के निकटवर्ती देवली गांव में फसलों की वास्तविक पैदावार का सटीक आकलन करने के लिए फसल कटाई प्रयोग किया गया, ताकि किसानों के बीमा क्लेम का रास्ता साफ हो सके।

खेतों में पहुंची कृषि विभाग की टीम ने राजस्व विभाग की ओर से रैंडम खसरा नंबर के आधार पर चयनित खेत में 5 गुना 5 मीटर का प्लॉट निर्धारित कर, पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से गेहूं की फसल की कटाई की। इस प्रक्रिया का सघन निरीक्षण सहायक निदेशक (कृषि सांख्यिकी) राजेंद्र कुमार पोरवाल और कृषि अधिकारी प्रियंका पारीक ने किया।

पारदर्शिता पर जोर, सात साल का औसत तय करेगा क्लेम

कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने मौके पर मौजूद संबंधित कार्मिकों को सख्त निर्देश दिए कि फसल कटाई प्रयोग में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और तय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। इससे क्षेत्र की सही औसत पैदावार सामने आ सके।

उन्होंने बताया कि इसी प्रयोग से प्राप्त उपज के आधार पर प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन का आकलन होता है। योजना के अनुसार यदि वर्तमान फसल की पैदावार पिछले सात वर्षों की औसत पैदावार से कम पाई जाती है, तो ऋणी किसानों को हुए नुकसान के एवज में इसी रिपोर्ट के आधार पर क्लेम दिया जाता है।

बीमा दावों के निस्तारण में निभाता है अहम भूमिका

फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त आंकड़े सिर्फ पैदावार का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह बीमा दावों के निस्तारण और अन्य सरकारी कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। इस मौके पर सहायक कृषि अधिकारी गोविन्द सहाय शर्मा सहित बड़ी संख्या में जागरूक किसान भी मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया को देखा।