भीलवाड़ा

बनास नदी में माफियाओं का राज: बहते पानी में जेसीबी-एलएनटी से बजरी खनन, पुलिस पर मदद का आरोप

धीरज बोले न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना, प्रशासन नहीं जागा तो ग्रामीण डेरा डालेंगे नदी में

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Oct 09, 2025
Mafia rule in Banas river: JCB-LNT gravel mining in flowing water, police accused of helping

बनास नदी में खुलेआम हो रहे बजरी खनन के खिलाफ बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव धीरज गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बनास नदी में बहते पानी के बीच जेसीबी और एलएनटी उतारकर बजरी निकाल रहे हैं, और इसमें पुलिस की मिलीभगत भी सामने आ रही है।

गुर्जर ने कहा कि न्यायालय ने 2012 में स्पष्ट आदेश दिया था कि बहते पानी में बजरी खनन नहीं हो सकता, परंतु आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एनजीटी ने भी कहा था कि नदी में कोई मशीन नहीं उतारी जाए, मगर खनन माफिया नियमों को रौंद रहे हैं।

बनास हमारी मां है’, बोले ग्रामीण

सोपुरा, चांदगढ़, आकोला, जीवाखेड़ा, दोवनी, खजीना, होलीरड़ा, गेगा का खेड़ा और बडलियास सहित कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ भीलवाड़ा पहुंचे। जेल चौराहे से बनास बचाओ के नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला गया। ग्रामीणों ने कहा कि बनास हमारी मां है। यह हमारी जमीन, हमारा पानी और हमारी नदी है। प्रशासन खनन रोकने में नाकाम रहा है। माफिया पुलिस की मदद से हमें डराते-धमकाते हैं।

महिलाओं ने हाथों में बनास बचाओ की तख्तियां लेकर नारेबाजी की, जबकि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर आंदोलन के बैनर लगे हुए थे। ज्यादातर ट्रैक्टरों पर नंबर तक नहीं लिखे थे। गुर्जर ने आरोप लगाया कि खनन लीज धारक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जहां एक रवन्ना की अनुमति है, वहां से पांच से अधिक वाहन बजरी लेकर जा रहे हैं। सीमाज्ञान तक नहीं हुआ, फिर भी मशीनें नदी में चल रही हैं। प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो हजारों

लीजधारक पर गंभीर आरोप

आकोला क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि एक लीजधारक द्वारा एलएनटी व जेसीबी मशीनें नदी के पानी में उतारकर बजरी निकाली जा रही है। इसमें पुलिस की सीधी मदद मिल रही है। बाहर से ताकतवर लोगों को बुलाकर रॉयल्टी नाकों से वाहन निकाल रहे है। चांदगढ़ के ग्रामीणों ने कहा कि चरागाह भूमि में रास्ते बना दिए गए हैं। पूरी चरागाह भूमि को खोद दिया गया है। मिट्टी और ग्रेवल डालकर रास्ते बना दिए गए हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।

प्रशासन नींद में है...

ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन और सरकार दोनों नदी बचाने में असफल रहे हैं। बनास सिर्फ पानी की धारा नहीं, हमारी जीवनधारा है। इसे खोने नहीं देंगे। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता गोपाल मालवीय, कुणाल ओझा समेत अनेक कार्यकर्ता व महिलाएं उपस्थित थे।

Published on:
09 Oct 2025 11:01 am
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