- घर में गंगाजल मिलाकर नहाने से भी मिलेगा अश्वमेघ यज्ञ जैसा फल - भगवान विष्णु का अंश रहता है जल में, सूर्य उपासना और गीता पाठ से संवरेगा भाग्य - तिल-गुड़ का सेवन बढ़ाएगा सेहत
हिंदू पंचांग के 11वें महीने 'माघ' का शुभारंभ रविवार से हो रहा है, जो 1 फरवरी तक रहेगा। धर्म, अध्यात्म और आरोग्य की दृष्टि से यह महीना बेहद खास माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में किए गए पूजन, तीर्थ दर्शन और पवित्र नदियों में स्नान से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। इस पूरे माह में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष विधान है।
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि पुराणों में उल्लेख है कि माघ के दौरान गंगाजल में भगवान विष्णु का अंश विद्यमान रहता है। वैसे तो गंगा स्नान सदैव शुभ है, लेकिन इस माह में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। प्रयाग, काशी, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र और नैमिषारण्य जैसे तीर्थों में स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। यदि नदियों तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। जिले में गंभीरी व बेड़च नदी में भी स्नान कर सकते है।
यह महीना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का भी समय है। इस दौरान सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाना और श्रीमद्भगवद् गीता या रामायण का पाठ करना आत्मिक शांति प्रदान करता है। कड़ाके की सर्दी के इस मौसम में खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी है। माघ में तिल और गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिए उत्तम बताया गया है।