राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के खान विभाग की ओर से केवल ड्रोन सर्वे के आधार पर खनन पट्टाधारकों को जारी किए गए करोड़ों रुपए के वसूली (डिमांड) नोटिस को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सर्वे चाहे भौतिक हो या ड्रोन के जरिए, उससे पहले संबंधित […]
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के खान विभाग की ओर से केवल ड्रोन सर्वे के आधार पर खनन पट्टाधारकों को जारी किए गए करोड़ों रुपए के वसूली (डिमांड) नोटिस को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सर्वे चाहे भौतिक हो या ड्रोन के जरिए, उससे पहले संबंधित पक्षकार को नोटिस देना और उसे प्रक्रिया में शामिल करना अनिवार्य है। न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी ने भीलवाड़ा के एक खान व्यवसायी की याचिका पर सुनवाई करते हुए विभाग की ओेर से जारी 'कारण बताओ नोटिस' को रद्द कर दिया है।
भीलवाड़ा निवासी तुलसीदास भारवानी ने अधिवक्ता हिमांशु के जरिए रिट याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि खनन अभियंता कार्यालय भीलवाड़ा ने 27 नवंबर 2025 को याचिकाकर्ता की लीज क्षेत्र का ड्रोन से सर्वे किया था। इस सर्वे के आधार पर विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर आरोप लगाया कि खान मालिक ने स्वीकृत सीमा से अधिक खनिजों का अवैध खनन किया है। याचिकाकर्ता ने इसे यह कहते हुए चुनौती दी कि सर्वे के समय उन्हें कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। हालांकि खान विभाग ने तुलसीदास के साथ 8 अन्य लीज धारकों को भी नोेटिस जारी किए हैं। इस आदेश के बाद अन्य खान मालिक भी राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं। यह सभी खदाने चुनाई पत्थर की हैं।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि एडिशनल एडवोकेट जनरल इस बात से इनकार नहीं कर पाए कि ड्रोन सर्वे से पहले खान मालिक को नोटिस नहीं दिया गया था। कोर्ट ने पूर्व के 'बाबू भाई पटेल' और 'मेवाड़मार्बल्स' केस के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना नोटिस के किया गया सर्वे और उस पर आधारित रिकवरी आदेश अवैध हैं।
अदालत ने याचिका को मंजूर करते हुए विभाग को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं।