- घोषणा के जमीन पर काम शुरू नहीं, टेंडर प्रक्रिया में उलझा मरम्मत का काम - जिले के 771 स्कूल को नहीं मिला पैसा, कैसे शुरू कराए काम
झालावाड़ में सरकारी स्कूल भवन गिरने से मासूम बच्चों की मौत के बाद भी राजस्थान सरकार बच्चों की सुरक्षा में गंभीर नजर नहीं आ रही। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए प्रति स्कूल दो-दो लाख रुपए देने की घोषणा कर दी, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक ही है। हालात यह हैं कि प्रशासनिक स्वीकृति के बावजूद अधिकांश जिलों में अब तक मरम्मत काम काम शुरू नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि प्रदेशभर में कराए गए सर्वे में हजारों सरकारी स्कूल भवन जर्जर पाए गए थे। कई स्कूलों को सील करना पड़ा, तो कई पर ताले लटका दिए थे। अकेले भीलवाड़ा जिले में ऐसे 123 से अधिक स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं जबकि 1627 स्कूल भवन ऐसे हैं जिनमें तत्काल मरम्मत की जरूरत बताई गई थी।
सरकार की घोषणा के बावजूद अब तक भीलवाड़ा जिले में 1627 में से केवल 856 स्कूलों के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी हो सकी है। बाढ़ और अत्यधिक बारिश से क्षतिग्रस्त इन 856 स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए 17 करोड़ 12 लाख की राशि एसडीआरएफ मद से स्वीकृत की है। शेष 771 स्कूल अब भी बजट का इंतजार कर रहे हैं।
समग्र शिक्षा विभाग के जेइएन सुरेश लोदी ने बताया कि 856 स्कूलों के लिए 17-12 करोड़ की स्वीकृत राशि हाल ही में विभाग को मिली है। अब इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। टेंडर जारी होने और एजेंसियों के चयन के बाद ही मरम्मत कार्य शुरू हो सकेगा। यही वजह है कि फिलहाल प्रदेश के किसी भी जिले में स्कूल भवनों की मरम्मत का काम धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है।
आदेश के अनुसार मरम्मत कार्य समग्र शिक्षा के माध्यम से कराए जाएंगे। भीलवाड़ा के छह उपखंडों में जिन स्कूलों के लिए राशि जारी की गई है। उनका काम अगले साल ही शुरू हो सकेंगे।
कुल मिलाकर 856 विद्यालयों के लिए 17.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जिले के अन्य आठ उपखंडों के इतने ही स्कूल अभी भी राशि का इंतजार कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ से कई स्कूल भवन बेहद जर्जर हो गए। इससे शिक्षण कार्य और बच्चों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। मरम्मत कार्य कब शुरू होगा, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। अधिकारियों के अनुसार यदि मार्च से पहले काम पूरा नहीं हुआ, तो भुगतान में भी दिक्कत आ सकती है। उधर अभिभावकों का कहना है कि जब तक मरम्मत कार्य वास्तव में शुरू नहीं होते, तब तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जान जोखिम में बनी रहेगी।