शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बरकरार है। शहर के प्रमुख रिहायशी इलाके नेहरू विहार और तिलक नगर आवासीय योजना से जुड़े क्षेत्र की यही कहानी है। यहां 6 से 7 सेक्टरों में सैकड़ों परिवार निवास करते हैं, लेकिन विडंबना है […]
शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बरकरार है। शहर के प्रमुख रिहायशी इलाके नेहरू विहार और तिलक नगर आवासीय योजना से जुड़े क्षेत्र की यही कहानी है। यहां 6 से 7 सेक्टरों में सैकड़ों परिवार निवास करते हैं, लेकिन विडंबना है कि इस पूरे इलाके में बच्चों के लिए एक भी सरकारी विद्यालय नहीं है।
सरकारी स्कूल नहीं होने का खामियाजा यहां के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। अभिभावक नहीं चाहते हुए भी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने और भारी-भरकम फीस चुकाने को मजबूर हैं। इसी दर्द को बयां करते हुए क्षेत्रवासियों ने ''राजस्थान पत्रिका जनमंच'' के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई है।
नेहरू विहार क्षेत्रवासियों (सेक्टर 12 से 16 व अन्य) का कहना है कि शहर के अन्य इलाकों जैसे बापू नगर, सुभाष नगर और राजेंद्र मार्ग में जिस तरह सर्वसुविधायुक्त सरकारी विद्यालय संचालित हैं, वैसी ही सुविधा नेहरू विहार को भी मिलनी चाहिए।
प्रशांत चतुर्वेदी और समस्त क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि यहां केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि 12वीं स्तर सीनियर सेकेंडरी का विद्यालय खोला जाए। स्कूल में विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकाय शुरू किए जाएं ताकि हर रुचि के विद्यार्थी को मौका मिले। वही ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की भावना के साथ निशुल्क शिक्षा का लाभ मिल सके।
क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार से विशेष आग्रह किया है कि आगामी बजट में नेहरू विहार में सरकारी स्कूल खोलने के प्रस्ताव को शामिल किया जाए। पत्र में लिखा गया है कि यदि बजट में इसकी घोषणा होती है, तो यह सैकड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी और शिक्षा का अधिकार सही मायने में धरातल पर उतरेगा।
प्रशांत चतुर्वेदी का कहना है कि नेहरू विहार जोन काफी बड़ा है और यहाँ आबादी का घनत्व लगातार बढ़ रहा है। सरकारी स्कूल के अभाव में बच्चों को दूरदराज जाना पड़ता है या महंगे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना पड़ता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि सरकार इसी सत्र या आगामी बजट में यहाँ 12वीं तक का स्कूल स्वीकृत करे। ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके।