5 महीने से दर-दर भटक रही विधवा, 10 दिन में समाधान नहीं तो भूख हड़ताल
सरकारी सिस्टम की लालफीताशाही और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की खामियों ने एक शहीद शिक्षक के परिवार को भुखमरी और बेघर होने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। ऑन ड्यूटी जान गंवाने वाले शारीरिक शिक्षक की विधवा पिछले पांच महीने से पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए शिक्षा विभाग और पेंशन कार्यालयों के चक्कर काट रही है। अधिकारी सॉफ्टवेयर में खराबी का बहाना बना रहे हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रही विधवा को अब बैंक से मकान कुर्क होने की धमकियां मिल रही हैं। परेशान पीड़िता ने चेतावनी दी है कि 10 दिन में प्रोविजनल पेंशन नहीं मिलती है तो वह स्कूल के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेगी।
करेड़ा तहसील के गांव बड्डू निवासी चंचल कंवर ने जिला शिक्षा अधिकारी को दिए ज्ञापन में बताया कि उनके पति अजीत सिंह चुंडावत जो राजकीय विद्यालय मेवासा में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। 4 नवम्बर 2025 को खेलकूद प्रतियोगिता में विभागीय ड्यूटी देकर वापस लौटते समय वाहन दुर्घटना में निधन हो गया। ऑन ड्यूटी मौत के बावजूद पांच माह से अधिक समय बीतने पर भी परिवार को पेंशन मिली न ग्रेच्युटी का भुगतान हुआ है और न ही पीपीओ जारी हुआ। इसके कारण उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़िता ने बताया कि उसने एसएसओ आईडी के माध्यम से दस्तावेजों के साथ आवेदन कर दिया था। जब करेड़ा कार्यालय में पता किया तो जवाब मिला कि प्रकरण अतिरिक्त निदेशक पेंशन कार्यालय अजमेर में लंबित है। अजमेर क्षेत्रीय कार्यालय का तर्क है कि अब काम ऑनलाइन होता है, करेड़ा कार्यालय से जो आक्षेप लगाए गए थे, वे सिस्टम में एडिट या डिलीट नहीं हो रहे हैं। करेड़ा के कर्मचारी कहते हैं कि उनके यहां से भी आपत्ति डिलीट नहीं हो रही है। इसलिए एडिशनल पेज जोड़कर आक्षेप पूर्ति कर दी है।
विधवा पेंशन प्रकरण से संबंधित पत्र मुझे सोमवार को ही प्राप्त हुआ है। मैं स्वयं इस मामले को दिखवा रहा हूं। जो भी तकनीकी समस्या या अड़चन आ रही है, उसका पता लगाकर जल्द से जल्द प्रकरण का निस्तारण करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
- राजेन्द्र गग्गड़, जिला शिक्षा अधिकारी भीलवाड़ा