धूल मिट्टी से सभी परेशान, जिम्मेदार विभाग अनजान वस्त्रनगरी अब धीरे-धीरे ‘प्रदूषण नगरी’ में तब्दील होती जा रही है। औद्योगिक विकास की दौड़ में पर्यावरण के मानकों को जिस तरह ताक पर रखा जा रहा है, उसका सीधा खामियाजा शहर की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। सुबह की शुरुआत धूल के गुबार से हो […]
वस्त्रनगरी अब धीरे-धीरे 'प्रदूषण नगरी' में तब्दील होती जा रही है। औद्योगिक विकास की दौड़ में पर्यावरण के मानकों को जिस तरह ताक पर रखा जा रहा है, उसका सीधा खामियाजा शहर की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। सुबह की शुरुआत धूल के गुबार से हो रही है।
औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं और सड़कों पर उड़ती धूल ने भीलवाड़ा की आबोहवा को धुएं का चैंबर' जैसा बना दिया है। राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सख्त नियमों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
समोड़ी क्षेत्र गिट्टी क्रशर क्लस्टर हैं। यहां आते-जाते वाहनों से उड़ती धूल, क्रशर चलने के दौरान धूल और मिट्टी का फैलना न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि यह वहां काम करने वाले मजदूरों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। क्रशर की धूल हवा में मिल जाती है। इससे कई बीमारियां हो रही हैं। सिलिकोसिस, दमा, ब्रोंकाइटिस और खांसी होना तथा आंखों में जलन के मामले बढ़ रहे हैं। इस समस्या के निस्तारण के लिए किसी ने डस्ट सेप्रेशन सिस्टम नहीं लगा रखा है। क्रशर को कंसेन्ट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य है, लेकिन कई क्रशर बिना अनुमति के चल रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के हालिया आदेशों के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले क्रशरों पर 'पर्यावरण मुआवजा शुल्क लगाया जाता है जो किसी के अभी तक नहीं लगाया गया है।
एमजी हॉस्पिटल के श्वसन रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अस्थमा, एलर्जी और सांस फूलने की शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जो एक खतरे की घंटी है। कुछ सालों पहले दूषित पानी समस्या विकराल रूप ले रखी थी, लेकिन लगातार इसका मुद्दा छाया रहने तथा विभाग की ओर से कार्रवाई करने से अब 95 प्रतिशत तक दूषित पानी पर रोक लगी है, लेकिन धूल के गुब्बार अब एक नई समस्या बन गई है।
भीलवाड़ा का टेक्सटाइल उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन अनियंत्रित प्रदूषण उस रीढ़ को ही कमजोर कर रहा है। उद्योगों का चलना जरूरी है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों का मात्र शो-पीस बनकर रह जाना चिंताजनक है।
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की नियमित जांच कर रहे हैं। इनमें खामियां मिली हैं, उन्हें नोटिस जारी किए हैं। वायु प्रदूषण को लेकर विशेष अभियान चलाकर हर उद्योग की जांच कर रहे है। गिट्टी क्रशर से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए भी काम कर रहे हैं।
दीपक धनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल