भीलवाड़ा

राजस्थान का अनूठा गांव: बिना एलपीजी गैस सिलेंडर के चल रहा काम, बायोगैस प्लांट से चल रही गैस रिफाइनरी

Rajasthan's Unique Village: राजस्थान में एक ऐसा अनूठा गांव है जहाँ लोग बिना एलपीजी गैस सिलेंडर के काम चला रहे हैं। आइए इस गांव के बारे में जानते हैं।
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Jul 09, 2026
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फोटो पत्रिका

महंगाई के इस दौर में एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) के बढ़ते दाम की वजह से लोगों का बजट बिगड़ रहा है। ईरान युद्ध (War Against Iran) की वजह से गैस सिलेंडर की कमी और इसकी कीमत बढ़ने से कई लोगों की जेब को झटका लगा। हालांकि राजस्थान (Rajasthan) का एक गांव ऐसा भी है जहाँ गैस सिलेंडर की कमी और इसके दाम बढ़ने का कोई असर नहीं पड़ा। हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा (Bhilwara) जिले के आसींद (Asind) क्षेत्र के मोतीपुर गांव (Motipur Village) की।

बिना एलपीजी गैस सिलेंडर के चल रहा काम

मोतीपुर गांव देशभर के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गया है। इस गांव में पिछले चार साल से 120 घरों में एक भी एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं खरीदा गया है। लोग बिना सिलेंडर के ही काम चला रहे हैं। इस गांव की महिलाएं अब गैस एजेंसी की मोहताज नहीं हैं, बल्कि अपने घर के पशुधन से ही खुद की गैस रिफाइनरी चला रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार के साथ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पहल ने मोतीपुर गांव की तस्वीर ही बदल दी है।

बायोगैस प्लांट से चल रही गैस रिफाइनरी

मोतीपुर गांव में बायोगैस प्लांट से गैस रिफाइनरी चल रही है। गांव के 120 परिवारों ने बायोगैस प्लांट लगाया है। करीब 40 हज़ार रुपए की लागत वाले इन संयंत्रों के लिए सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने 30 हज़ार रुपए की सब्सिडी दी, जबकि सिर्फ 10 हज़ार रुपए का खर्चा ग्रामीणों को उठाना पड़ा। चार साल पहले शुरू हुई यह कवायद आज पूरे गांव के लिए आय का ज़रिया बन गई है। साथ ही इससे मोतीपुर के लोगों की एलपीजी गैस सिलेंडर पर निर्भरता भी खत्म हो गई है।

'वेस्ट से बेस्ट' कमाई, जैविक खाद के रूप में काम

बायोगैस के इस्तेमाल के बाद जो अपशिष्ट बचता है, वो भी किसानों के लिए सोना उगल रहा है। भीलवाड़ा डेयरी इस वेस्ट लिक्विड को 75 पैसे प्रति लीटर की दर से खरीदती है। ग्रामीणों के अनुसार इस प्रक्रिया से प्रत्येक किसान को प्रतिमाह 1,800 से 2,000 रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है। साथ ही बचा हुआ ठोस अपशिष्ट बेहतरीन जैविक खाद के रूप में खेतों में काम आता है, जिससे खेती में भी मदद मिल रही है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी गांव के लोग योगदान दे रहे हैं।

Updated on:
09 Jul 2026 07:22 am
Published on:
09 Jul 2026 05:31 am