भीलवाड़ा

राजीव गांधी ऑडिटोरियम भवन: जहां मारा हथौड़ा, वहां गिरा प्लास्टर

जोधपुर से आई टीम जांच रही भवन की सुरक्षा, रिपोर्ट में लगेंगे दो माह का समय

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Jul 27, 2024
जोधपुर से आई टीम जांच रही भवन की सुरक्षा, रिपोर्ट में लगेंगे दो माह का समय

भीलवाड़ा नगर विकास न्यास के लिए सफेद हाथी बन चुका राजीव गांधी ऑडिटोरियम भवन की सुरक्षा जांचने के लिए जोधपुर के एमबीएम यूनिवर्सिटी की टीम शुक्रवार को भीलवाड़ा पहुंची। प्रोफेसर अजय शर्मा की अगुवाई में आई दस सदस्यीय टीम भवन की अत्याधुनिक उपकरणों से जांच कर रही है। यहां टीम के सदस्यों ने जहां भी हथौड़ा मारा, वहां प्लास्टर गिरा है।

टीम ने विशेष तौर पर भवन को जिन पिलर्स (कॉलम) व बीम पर खड़ा किया गया है, उनकी जांच की। टीम ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की। कई जगह पिलर में लोहे के सरियों में जंग लग चुकी है। वहा 50 प्रतिशत लोहा खराब हो चुका है।

कॉलम में सामने आई खराबी

जोधपुर की टीम ने जब भवन के कॉलम पर हथौड़ा मारकर देखा तो वह सही नहीं निकले। यह स्थिति कई कॉलम की थी। टीम ने फिलहाल कुछ भी बताने से इंकार करते हुए कहा कि जांच पूरी होने पर ही कुछ कहां जा सकता है। टीम में प्रोफेसर प्रोफेसर अर्चना बोहरा समेत अन्य सदस्य भी शामिल है। इनके अलावा जयपुर की ईटीटीएल कम्पनी के सदस्य भी मशीनों के माध्यम से पिलर्स व बीम की जांच कर रहे है।

कलक्टर ने किया था दौरा

जिला कलक्टर नमित मेहता ने 11 मई को निरीक्षण किया तो भवन की जर्जर हालत देखने के बाद अधिकारियों को इसे सही करने के निर्देश दिए थे। उसके बाद ही न्यास ने एमबीएम यूनिवर्सिटी से सम्पर्क करके इसकी सुरक्षा की जांच के लिए 5.90 लाख रुपए की फीस जमा करवाई। इसके बाद गुरुवार को टीम जांच करने भीलवाड़ा पहुंची।

चार साल से केवल सरकारी कार्यक्रम

राजीव गांधी ऑडिटोरियम का शिलान्यास 30 जुलाई 2002 को हुआ था। लोकार्पण 16 सितंबर 2008 में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने किया था। भवन निर्माण कार्य में गड़बड़ी सामने आने तथा बेसमेन्ट में लगातार पानी भरा रहने से भवन के स्ट्रैक्चर को नुकसान हो रहा है। छत से पानी लिकेज होने से फॉल सिलिंग भी खराब हो चुकी है। किसी तरह का खतरा न हो इसके लिए भवन को वर्ष 2020 में ही सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए बंद कर दिया गया। भवन में केवल सरकारी आयोजन ही होते रहे है।

इनकी कर रहे जांच

टीम भवन के सभी कॉलम, बीम व अन्य स्ट्रक्चर की विस्तृत जांच के लिए नॉन डस्ट्रिक्टिव टेस्ट कर रही है। सेफ़ बीयरिंग कैपेसिटी टेस्ट, संरचना की ख़ामियों का पता लगाने के लिए सम्पूर्ण स्ट्रक्चर की जांच की जा रही है। कॉलम गड़बड पाए गए है। जांच में समय लगेगा।

प्रोफेसर अजय शर्मा, एमबीएम यूनिवर्सिटी जोधपुर

Published on:
27 Jul 2024 11:07 am
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