शिक्षा निदेशालय का अल्टीमेटम: बाबू बने शिक्षकों की मांगी रिपोर्ट
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नौनिहालों को पढ़ाने की जिम्मेदारी छोड़कर जिला कलक्टर, एसडीएम और अन्य सरकारी कार्यालयों में बाबू बनकर बैठे प्रारंभिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कार्मिकों पर अब गाज गिरना तय है। शिक्षा निदेशालय ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त अल्टीमेटम जारी किया है।
निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति या कार्य-व्यवस्था के नाम पर लगाए गए शिक्षकों की सूची हर हाल में तुरन्त भिजवाई जाए। आदेश की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त निदेशक ने साफ लिखा है कि चाही गई सूचना कार्यालय छोड़ने से पहले भिजवाना सुनिश्चित करें।
दरअसल, प्रारंभिक शिक्षा विभाग के कई कार्मिक और शिक्षक निर्वाचन एवं अन्य कार्यों के बहाने जिला कलक्टर, जिला निर्वाचन अधिकारी, उपखंड अधिकारी और अन्य विभागों में लंबे समय से जमे हुए हैं। संयुक्त शासन सचिव के आदेशों का हवाला देते हुए निदेशालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। इससे पहले निदेशालय ने 11 मार्च को भी पत्र लिखकर 15 मार्च तक ऐसे सभी अटैच कार्मिकों की सूचना मांगी थी, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारियों ने इस आदेश को हल्के में लिया और आज तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी।
निदेशालय ने 15 मार्च की डेडलाइन मिस होने के बाद अब सीधे आज ही कार्यालय छोड़ने से पहले सूचना देने का फरमान जारी किया है। निदेशालय ने व्यवस्था बनाई है कि भविष्य में हर तीन माह में महीने की 5 तारीख तक अटैच कार्मिकों की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से देनी होगी। लापरवाही को रोकने के लिए साफ्ट कॉपी निर्धारित ईमेल आईडी पर और हस्ताक्षर युक्त हार्ड कॉपी डाक से भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। चर्चा यह है कि कई कर्मचारी सालों से अन्य विभाग में लगे हुए है। यह राजनीतिक संरक्षण के चलते ऐसा हो रहा है।
निदेशालय से मिले निर्देश के बाद सभी ब्लॉक अधिकारियों से शुक्रवार सुबह तक सूचना मांगी है। उसे एक सीट पर तैयार कर निदेशालय भेजी जाएगी।
राजेन्द्र गग्गड़, डीईओ भीलवाड़ा