भीलवाड़ा

ग्रीष्मावकाश में कटौती का कड़ा विरोध: बच्चों व शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात

ग्रीष्मावकाश सहित अन्य छुट्टियों में की गई कटौती को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश
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Apr 05, 2026
Strong Opposition to Reduction in Summer Vacations: A Blow to the Interests of Students and Teachers
ग्रीष्मावकाश में कटौती का कड़ा विरोध: बच्चों व शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात

शिक्षा विभाग की ओर से आगामी सत्र के लिए ग्रीष्मावकाश सहित अन्य छुट्टियों में की गई कटौती को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) ने विभाग के इस फैसले की निंदा करते हुए इसे प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और भीषण गर्मी की अनदेखी बताया है।

संघ के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने आरोप लगाया कि जून के अंत तक प्रदेश में भयंकर लू और गर्मी का प्रकोप रहता है। इस जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर ग्रीष्मावकाश में कटौती करना सीधे तौर पर छोटे बालकों के स्वास्थ्य को संकट में डालना है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि शिक्षकों के अधिकारों पर भी बड़ा कुठाराघात है।

विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश

शिक्षक नेताओं का कहना है कि शिक्षा विभाग अपनी खामियों और विफलताओं को छिपाने के लिए शिक्षण समय और गुणवत्ता बढ़ाने का हवाला देकर ऐसे अनुचित फैसले ले रहा है। संघ ने स्पष्ट किया कि शिक्षण कोई मशीनी कार्य नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए छुट्टियों में कटौती नहीं, बल्कि बुनियादी सुधारों की आवश्यकता है।

संघ की प्रमुख मांगें

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों बीएलओ, सर्वे आदि से पूर्णतया मुक्त किया जाए। नई नियुक्तियों और रुकी हुई पदोन्नति के माध्यम से स्कूलों में खाली पड़े सभी पद अविलंब भरे जाएं। शिक्षकों को मोबाइल व ऑनलाइन फीडिंग के तनाव से मुक्त रखा जाए; इसके लिए हर स्कूल में अलग से कंप्यूटर स्टाफ की व्यवस्था हो। प्रत्येक विद्यालय में सफाई कर्मी और सहायक कर्मचारी की स्थायी नियुक्ति की जाए। शिक्षकों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार बंद हो और पारदर्शी व न्यायपूर्ण स्थानांतरण नीति लागू कर वर्षों की प्रताड़ना समाप्त की जाए।

ऐच्छिक अवकाश पर कैंची चलाना अस्वीकार्य

जिला मंत्री यासीन अली खान ने विभागीय अधिकारियों पर शिक्षकों के जायज हकों के प्रति द्वेष रखने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह शिक्षकों को भी वर्ष में दो दिन का ऐच्छिक अवकाश देय था, जिसका अधिकार संस्था प्रधान (प्रिंसिपल) को प्रत्यायोजित था। अब विभाग ने संस्था प्रधान के क्षेत्राधिकार वाले अवकाशों को मनमाने ढंग से घटाकर मात्र एक दिन कर दिया है। यह प्रदेश की सामाजिक और धार्मिक विविधता के प्रति विभाग की अनास्था को दर्शाता है, जिसे शिक्षक किसी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।

आदेश रद्द करने की उठाई मांग

जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मीकान्त खटीक ने कहा कि शिक्षा विभाग के ये बदलाव प्रतिगामी और शिक्षक विरोधी हैं। संघ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इन आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सकारात्मक एवं प्रगतिशील कदम उठाए जाएं।

Updated on:
05 Apr 2026 08:56 am
Published on:
05 Apr 2026 08:56 am
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