27 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

साइबर सुरक्षा का लगाए लोगो… डिजिटल जालसाजों की नई चाल: चुनावी हलचल के बीच एक छोटी सी भूल खाली कर सकती है बैंक खाता

Rajasthan

B- राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी, जानें ठगों के पैंतरों से बचने के मुकम्मल उपायB
BB

Bभीलवाड़ा. Bप्रदेश में नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियां तेज होते ही साइबर अपराधियों का गिरोह भी सक्रिय हो गया है। लोकतंत्र के इस पर्व में जहां एक तरफ मतदाता और प्रत्याशी अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर ठग आम नागरिकों, उम्मीदवारों और चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई पर डोरे डालने की फिराक में हैं। फर्जी वोटर लिस्ट अपडेट से लेकर चुनावी चंदे तक के नाम पर बिछाए जा रहे इस डिजिटल जाल को नाकाम करने के लिए राजस्थान पुलिस हरकत में आ गई है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम शाखा ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर प्रदेशवासियों को पूरी तरह मुस्तैद रहने का आह्वान किया है।


Bवोटर लिस्ट में अपना नाम देखें के भ्रम से बचेB
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह का कहना है कि चुनावी माहौल का फायदा उठाकर ठग अक्सर लोगों की उत्सुकता और हड़बड़ी का फायदा उठाते हैं। इन दिनों आपके मोबाइल पर "वोटर लिस्ट में अपना नाम देखें" या "आपका पोलिंग बूथ बदल गया है" जैसे लुभावने और भ्रम फैलाने वाले संदेशों की बाढ़ आ सकती है। ऐसे अनजान लिंक पर क्लिक करना आपके बैंक खाते के लिए भारी पड़ सकता है। चुनाव और मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए केवल राज्य निर्वाचन आयोग की प्रामाणिक वेबसाइटों का ही सहारा लेना समझदारी है।

BB

Bनकली प्रशासनिक अधिकारी की आ सकती कॉलB
डिजिटल ठगी का एक बड़ा जरिया वे कॉल भी बन रहे हैं जिनमें खुद को चुनाव आयोग का बड़ा अफसर बताकर ओटीपी या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी मांगी जाती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी असली प्रशासनिक अधिकारी कभी फोन पर व्यक्तिगत वित्तीय डेटा या ओटीपी नहीं मांगता। इसके अलावा, चुनावी दौर में चंदा देने या लेने की आड़ में भी कतिपय तत्व सक्रिय हैं। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि किसी से भी धन प्राप्त करने के लिए कभी यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करने या पिन डालने से पहले लेनदेन की पूरी पड़ताल कर लें।

BB

Bग्रुपों के एडमिन बरतें सावधानीB
तकनीक के इस दौर में चुनावी राजनीति को प्रभावित करने के लिए डीपफेक तकनीक, फर्जी वीडियो और मनगढ़ंत ऑडियो क्लिप्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर भ्रामक भाषण या संदेश को सच मानने के बजाय उसकी सत्यता जांचना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखें ताकि हैकिंग जैसी घटनाओं से बचा जा सके। इसी तरह, व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन भी केवल प्रशासक को ही मैसेज भेजने की अनुमति देकर भ्रामक खबरों के प्रसार पर लगाम लगा सकते हैं।

Bसाइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करे कॉल B
चुनाव संचालन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को भी हिदायत दी गई है कि वे किसी भी संवेदनशील चुनावी आंकड़े या दस्तावेज को निजी उपकरणों अथवा सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर साझा करने की भूल न करें। यदि इसके बावजूद कोई व्यक्ति किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय 'गोल्डन ऑवर' के भीतर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। राजस्थान पुलिस के विशेष हेल्पडेस्क नंबरों पर सूचना देकर भी अपनी राशि सुरक्षित कराई जा सकती है। सजगता ही सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है, इसलिए चुनावी उत्साह के बीच अपने डिजिटल कदम फूंक-फूंक कर रखें।

बड़ी खबरें

View All

भीलवाड़ा

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग