- दस लक्षण पर्व के पांचवें दिन ‘उत्तम सत्य धर्म’ की पूजा
सत्य की भाषा सबको प्रिय और मधुर लगती है, जबकि असत्य की भाषा निष्ठुर होकर संताप देती है। भय दिखाने वाली, क्रोध पैदा करने वाली या धमकाने वाली वाणी भी असत्य कही जाती है। शब्दों के हाथ, पैर और दांत नहीं होते, लेकिन इनके द्वारा लगा घाव बहुत गहरा होता है। यह बात पंडित राहुल जैन शास्त्री (सागर वालों) ने दस लक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन के दौरान कही। आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि पयुर्षण पर्व के पांचवे दिन अभिषेक व शांतिधारा करने वालों की होड रही। आदिनाथ भगवान की मूलनायक प्रतिमा पर 108 रिद्धि मंत्र से अभिषेक एवं स्वर्ण झारी से शांतिधारा ओमचंद रिखबचंद बाकलीवाल ने की। शांतिनाथ भगवान पर शांतिधारा ललित शाह ने की। अन्य प्रतिमाओं पर राकेश पहाड़िया, अनिल गंगवाल, बंसतीलाल काला, सनत अजमेरा, महावीर झांझरी, नरेश गंगवाल, डॉ. अभिषेक, कैलाश सोनी, जेपी अग्रवाल ने शांतिधारा की। शाम को सुधासागर निलय में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए तथा मंदिर में भक्तांबर आरती हुई। दस लक्षण पर्व में उत्तम सत्य धर्म की विशेष पूजा सामूहिक रूप से की गई। श्रद्धालुओं ने धर्मध्यान और पूजन में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ पाया।