भीलवाड़ा

खाकी की सरपरस्ती में पनप रहा माफिया, कोटड़ी-बीगोद में खुलेआम चल रही अवैध फैक्ट्रियां

रेत के सोने पर पुलिस-माफिया का गठजोड़: आलाकमान के नाम पर लाखों की वसूली से महकमे में हड़कंप

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Apr 05, 2026
खाकी की सरपरस्ती में पनप रहा माफिया, कोटड़ी-बीगोद में खुलेआम चल रही अवैध फैक्ट्रियां

भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी और बीगोद क्षेत्र में पिछले कई सालों से अवैध गारनेट (रेत का सोना) का गोरखधंधा चरम पर है। पुलिस और माफिया की मिलीभगत के चलते यह अवैध कारोबार बिना किसी रोक-टोक के बेखौफ चल रहा है। हालात यह हैं कि पुलिस अधिकारी आलाकमान (उच्चाधिकारी) के नाम पर माफिया से लाखों रुपए की अवैध वसूली कर रहे हैं। हाल ही कोटड़ी क्षेत्र में पकड़े गए गारनेट के एक बड़े जखीरे के मामले में भारी भरकम रकम वसूलने की भनक जब उच्चाधिकारियों को लगी, तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

खुलेआम चल रहा खेल, फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं

कोटड़ी थाना क्षेत्र और बीगोद के आस-पास अवैध गारनेट फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं। इन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। माफिया इस कदर बेखौफ हैं कि चोरी-छिपे डंपरों और ट्रकों से गारनेट मिश्रित बजरी लाई जाती है और फिर मशीनों से छानकर उसमें से गारनेट अलग किया जाता है। कार्रवाई का डर नहींहोने के कारण रोजाना सैकड़ों टन गारनेट तैयार कर खुले में सुखाया जा रहा है।

नदी-नालों के पास बना लिए अवैध गोदाम

बजरी की तुलना में गारनेट काफी महंगा बिकता है, इसलिए इसे बजरी का सोना कहा जाता है। गारनेट में हो रही छप्परफाड़ कमाई के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इस काले कारोबार का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। बाहरी व्यापारी भी इसे खरीदने के लिए आते हैं। इसके लिए माफिया ने कोटड़ी और बीगोद क्षेत्र में नदी-नालों के किनारे अनाधिकृत रूप से बड़े गोदाम बना लिए हैं, जहां से बजरी व मिट्टी से गारनेट निकालकर सीधे एक्सपोर्ट किया जा रहा है।

क्वालिटी के हिसाब से 8 से 10 रुपए किलो का भाव

तैयार गारनेट को व्यापारी उसकी क्वालिटी के हिसाब से 8 से 10 रुपए प्रति किलो के भाव से खरीदते हैं। इस अवैध कारोबार का स्केल कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खनिज विभाग ने वर्ष 2017-18 में ही 80 केस बनाकर माफिया से 1 करोड़ 77 लाख 88 हजार रुपए की भारी-भरकम पेनल्टी वसूली थी। इसके बावजूद यह कारोबार रुकने के बजाय पुलिस की ढिलाई से कई गुना बढ़ गया है।

क्या काम आता है यह गारनेट

गारनेट की विदेशों में जबर्दस्त मांग है। कुछ समय पहले तक इसका निर्यात मुख्य रूप से तमिलनाडु से ही होता था, लेकिन अब विशेषकर भीलवाड़ा क्षेत्र से इसका निर्यात हो रहा है। गुणवत्ता के आधार पर इसके अलग-अलग उपयोग हैं। इसका मुख्य इस्तेमाल रेजमाल (सैंडपेपर) बनाने में होता है। क्रॉकरी निर्माण में भी गारनेट का प्रयोग किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता का और साफ गारनेट होने पर इसका उपयोग कीमती नगीने (रत्न) के रूप में भी किया जाता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग और कीमत हमेशा ऊंची रहती है।

Published on:
05 Apr 2026 09:06 am
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