– सागवाड़ा में हुई विनती स्वीकार, 2012 का इतिहास दोहराने की आस, जब एक साथ निकले थे दिगंबर-श्वेतांबर वस्त्रनगरी एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनने जा रही है। राष्ट्रसंत आचार्य पुलकसागर (ससंघ 9 पिच्छी) का आगामी चातुर्मास भीलवाड़ा में होने की प्रबल संभावना बनी है। शुक्रवार को भीलवाड़ा से सागवाड़ा पहुंचे जैन समाज […]
वस्त्रनगरी एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनने जा रही है। राष्ट्रसंत आचार्य पुलकसागर (ससंघ 9 पिच्छी) का आगामी चातुर्मास भीलवाड़ा में होने की प्रबल संभावना बनी है। शुक्रवार को भीलवाड़ा से सागवाड़ा पहुंचे जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल को आचार्य ने इसके सुखद संकेत दिए हैं। हालांकि, इसकी विधिवत घोषणा बाद में की जाएगी। शास्त्रीनगर मेन सेक्टर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रवीण चौधरी के नेतृत्व में समाज का एक दल सागवाड़ा पहुंचा। वहां विराजमान आचार्य पुलकसागर के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आगामी चातुर्मास भीलवाड़ा में करने की भावभरी विनती की गई। समाज के आग्रह और भक्ति को देखते हुए आचार्य ने इस पर अपनी सहमति व्यक्त की है।
ट्रस्ट के महासचिव जयकुमार पाटनी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर का भीलवाड़ा से गहरा नाता रहा है। वे वर्ष-2012 और 2015 में अल्प प्रवास पर यहां आ चुके हैं, लेकिन उनकी वे यात्राएं ऐतिहासिक थीं। इतिहास में यह आचार्य पुलकसागर का ही प्रभाव था कि वर्ष 2012 में महावीर जयंती पर दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज, जो अक्सर अलग-अलग आयोजन करते थे, एक जाजम पर आ गए थे। चित्रकूट धाम से दोनों समाजों का जुलूस एक साथ निकला, जो एकता की एक मिसाल बना। उसके बाद से शहर में ऐसा संयुक्त जुलूस दोबारा नहीं निकल सका। वर्ष 2015 में भी आचार्य के सानिध्य में चित्रकूट धाम में सात दिवसीय ज्ञानगंगा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ था। समाज को उम्मीद है कि इस चातुर्मास से भीलवाड़ा में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का नया अध्याय लिखा जाएगा।