भिवाड़ी. रीको उद्योग क्षेत्र के चारों तरफ चारीदीवारी तोडऩे के साथ ही रीको की जमीन पर कब्जों का खेल भी चल रहा है। रीको अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद मामले को दबाया जा रहा है। बंदापुर उद्योग क्षेत्र में रीको की करोड़ों रुपए की जमीन पर तीन मंजिल श्रमिक कॉलोनी सहित अन्य निर्माण […]
भिवाड़ी. रीको उद्योग क्षेत्र के चारों तरफ चारीदीवारी तोडऩे के साथ ही रीको की जमीन पर कब्जों का खेल भी चल रहा है। रीको अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद मामले को दबाया जा रहा है। बंदापुर उद्योग क्षेत्र में रीको की करोड़ों रुपए की जमीन पर तीन मंजिल श्रमिक कॉलोनी सहित अन्य निर्माण किए जा चुके हैं। सभी निर्माण रीको अधिकारियों की निगरानी में चल रहे हैं। रीको अधिकारी क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करते हैं लेकिन उन्हें विभाग की जमीनों पर हुए कब्जे दिखाई नहीं देते। बंदापुर में भी रीको की जमीन पर निर्माण निरंतर जारी है। अवैध कब्जा करने वालों ने रीको की जमीन हड़पने के बाद उस पर श्रमिक कॉलोनी बसा दी, सैकड़ों मजदूरों को किराए पर कमरे दे दिए और लाखों रुपए महीना किराया वसूल जा रहा है लेकिन यह सब कुछ रीको अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रहा। रीको अधिकारी विभाग के हित में काम करने की जगह अलग उद्देश्य से काम कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि कारोली, सलारपुर में रीको की दीवार तोडऩे के बाद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। दीवार तोडक़र रीको की सडक़, बिजली लाइन, नाली सहित अन्य संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है लेकिन उसे रोकने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है।
करोड़ों की कीमत
बंदापुर में रीको की जिस जमीन पर माफिया ने कब्जा किया है, उसकी कीमत करोड़ों रुपए है। रीको एक तरफ ईमानदारी से उद्योग चलाने वाले उद्यमियों से एक-एक रुपए का हिसाब बराबर करती है, वहीं दूसरी तरफ कब्जा करने वालों पर मेहरबानी बरती जा रही है। कब्जे का क्षेत्रफल और दायरा लगातार बढ़ता रहा है। इसके बावजूद कोई रोकटोक नहीं हो रही है।
बंदापुर क्षेत्र में रीको की जमीन पर अगर कोई कब्जा कर निर्माण किया गया है तो उसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अखिल अग्रवाल, यूनिट हेड, रीको