सरकारी भूमि से दिनरात चल रहा अवैध खनन, निशुल्क मिट्टी खोदकर कर रहे करोड़ों की कमाईभिवाड़ी. उद्योग क्षेत्र में मिट्टी सोना बन चुकी है लेकिन इसकी सारसंभाल एवं रखरखाव में जिम्मेदार विभाग लापरवाही बरत रहे हैं। मिट्टी नहीं रहने पर, भविष्य में जिम्मेदार विभाग ही खरीदने के टेंडर करते नजर आएंगे, ऐसा पहले भी हुआ […]
सरकारी भूमि से दिनरात चल रहा अवैध खनन, निशुल्क मिट्टी खोदकर कर रहे करोड़ों की कमाई
भिवाड़ी. उद्योग क्षेत्र में मिट्टी सोना बन चुकी है लेकिन इसकी सारसंभाल एवं रखरखाव में जिम्मेदार विभाग लापरवाही बरत रहे हैं। मिट्टी नहीं रहने पर, भविष्य में जिम्मेदार विभाग ही खरीदने के टेंडर करते नजर आएंगे, ऐसा पहले भी हुआ है। काली खोली धाम में इस समय दिनदहाड़े मिट्टी का अवैध खनन हो रहा है लेकिन इसको रोकने वाला कोई नहीं है। प्रशासन की आंखों के सामने माफिया मिट्टी खोद रहा है। दिन में जेसीबी लगाकर डंपर भरे जा रहे हैं। आïैद्योगिक क्षेत्र में मिट्टी डाली जा रही है। सरकारी भूमि से मिट्टी खोदने के बाद निजी खातेदारी और अन्य स्थलों पर स्टॉक भी किया जाता है, सभी काम धड़ल्ले से चल रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों को इसकी भनक नहीं लग रही है, धमाके की आवाज को भी अनसुना किया जा रहा है। किसकी शह पर सारा खेल चल रहा है, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
खोद डाली गहरी खाई
काली खोली में अवैध मिट्टी खनन का आलम यह है कि कई दर्जन स्थलों पर सैकड़ों फीट गहरी खाई खोद डाली हैं। सैकड़ों फीट ऊंचाई के मिट्टी के टीले अब गायब हो चुके हैं। दिनरात यहां बेरोकटोक मिट्टी का खनन चलता रहता है। बीडा की ओर से काली खोली सब्जी मंडी में नालियों का निर्माण कराया जा रहा है। यहां से दिन में भी अवैध खनन की मिट्टी लेकर डंपर गुजरते हैं, इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों को खबर नहीं लगी।
एक दूसरे पर टाल रहे विभाग
नियमानुसार कृषि भूमि पर काश्तकार को चार फीट तक मिट्टी खुदाई को लेकर किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं होती। इससे अधिक मिट्टी का खुदाई करने के लिए खनन विभाग से अनुमति लेनी होती है। सिवायचक भूमि पर मिट्टी की खुदाई रोकने की जिम्मेदारी तहसीलदार और एसडीएम की होती है। काली खोली में जानकारी के अनुसार बीडा और नगर परिषद की भूमि है। सैकड़ों फीट मिट्टी की खुदाई चल रही है। बिना पंजीयन के डंपर मिट्टी लेकर सडक़ों पर दौड़ते हैं। काली खोली में वन विभाग की भी कई चौकियां स्थापित हैं। पुलिस की गश्त भी चलती है। तेज रफ्तार बिना पंजीयन डंपर सडक़ों पर दौड़ते हैं। इस तरह कई विभाग होने के बाद बावजूद मिट्टी के अवैध खनन का खेल जोरशोर से खुलेआम चल रहा है। खुले में चलने के बावजूद संबंधित विभाग शांति से बैठकर सब कुछ देख रहे हैं। कई विभागीय अधिकारी ऐसे भी है, जिन्हें मिट्टी का अवैध खनन करने वालों के नाम और घर का भी पता मालूम हैं, इसके बावजूद कोई रोकने को तैयार नहीं है।
ऐसे चला बेचने खरीदने का सिलसिला
बीडा ने बायपास सडक़ चौड़ीकरण कराया, दोनों तरफ दो लेन की खुदाई से मिट्टी निकली, इसे खुर्दबुर्द करने के साथ बेच दिया गया। जबकि उसी दौरान बीडा ने स्टेडियम निर्माण के लिए मिट्टी खरीदी। इस तरह एक विभाग ने एक समय में अपनी मिट्टी का संरक्षण नहीं किया, जिम्मेदारों ने मिलीभगत कर मिट्टी को ठिकाने लगा दिया, जबकि उन्हीं अधिकारियों ने स्टेडियम में जरूरत पडऩे पर मिट्टी खरीद ली।
काली खोली में हमारा एक खसरा है, जिस पर पूर्व में अवैध मिट्टी खनन हुआ है। इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। एक टीम गठित कर दी है जो कि लगातार निगरानी करेगी।
मुकेश चौधरी, आयुक्त, नगर परिषद
काली खोली में मिट्टी के अवैध खनन पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र कुमार, तहसीलदार, बीडा