भिवाड़ी. उद्योग क्षेत्र के आसपास अवैध मिट्टी खनन सरकारी भूमि से चोरी तक सीमित नहीं है। इसके आर्थिक, सडक़ दुर्घटना और प्रदूषण फैलाने में भी बड़ा योगदान है। सडक़ पर तेज रफ्तार दौड़ते अवैध मिट्टी खनन के वाहनों पर पंजीयन संख्या तक नहीं है। सरकारी भूमि से मिट्टी चोरी कर सरकारी राजस्व का नुकसान किया […]
भिवाड़ी. उद्योग क्षेत्र के आसपास अवैध मिट्टी खनन सरकारी भूमि से चोरी तक सीमित नहीं है। इसके आर्थिक, सडक़ दुर्घटना और प्रदूषण फैलाने में भी बड़ा योगदान है। सडक़ पर तेज रफ्तार दौड़ते अवैध मिट्टी खनन के वाहनों पर पंजीयन संख्या तक नहीं है। सरकारी भूमि से मिट्टी चोरी कर सरकारी राजस्व का नुकसान किया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रैक्टर-ट्रॉली हो या डंपर सभी में मिट्टी भरने के बाद तेज गति वाहन से सडक़ों पर धूल उड़ती है। वाहन में भरी मिटï्टी उडकऱ सडक़ों पर गिरती है, जिससे सडक़ गंदी होने के साथ वायु प्रदूषण फैलता है। हवा में धूल की मात्रा अधिक होने से आमजन को सांस लेने में तकलीफ होती है। जो दोपहिया चार पहिया वाहन चालक इन अवैध मिटï्टी के वाहन के पीछे होते हैं, उन्हें धूल मिटï्टी उडऩे से रास्ता दिखाई नहीं देता। इस तरह अवैध मिट्टी खनन उद्योग क्षेत्र के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं करते।
सडक़ों की सफाई में लाखों रुपए महीने का खर्च
एक तरफ अवैध खनन के वाहन बिना ढके मिटï्टी का परिवहन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बीडा, रीको, नगर परिषद रोड स्वीपिंग मशीन से सफाई में प्रति महीने लाखों रुपए खर्च करते हैं। दोनों रीको कार्यालय, बीडा और नगर परिषद को मिलाकर प्रति महीने करीब 25 से 30 लाख रुपए रोड स्वीपिंग मशीनों पर खर्च होते हैं। अवैध खनन के वाहनों को रोके बिना लाखों रुपए महीने खर्च करना सरकारी राजस्व की बर्बादी है। जिस रास्ते से अवैध मिटï्टी खनन के वाहन गुजरते हैं, वहां पर धूल ही धूल उड़ती दिखाई देती है।
बिना पंजीयन के कोई भी वाहन रोड पर संचालित नहीं हो सकता। ऐसे वाहन पकडकऱ सीज किए जाएंगे।
राजीव चौधरी, डीटीओ