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गीले कचरे से ऑर्गेनिक खाद का पहला लॉट हुआ तैयार

अरावली विहार सेक्टर आठ के 320 फ्लेट से प्रतिदिन औसत 160 किलो गीला कचरा निकल रहा है, एक महीने में कंपोस्ट तैयार हो जाता है। अब यहां पर ऑर्गेनिक खाद उत्पादन शुरू हो चुका है।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

May 14, 2026

bhiwadi

एक सोसायटी से डंपिंग साइट में फेेंके जाने वाले कचरे पर लगी रोक

भिवाड़ी. अरावली विहार सेक्टर आठ के 320 फ्लेट से प्रतिदिन औसत 160 किलो गीला कचरा निकल रहा है, एक महीने में कंपोस्ट तैयार हो जाता है। अब यहां पर ऑर्गेनिक खाद उत्पादन शुरू हो चुका है। खाद की खासियत यह है कि प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार होता है। नारियल का बुरादा, माइक्रोव्स मिलाते हैं। इस ऑर्गेनिक खाद में बदबू नहीं आती और बिजली का उपयोग नहीं होता। 16 लाख की लागत से सोसायटी में डस्टबिन बांटे हैं, शेड निर्मित कर कंपोस्टर लगाया है। ब्लैक गोल्ड (कंपोस्ट) को ऑर्गेनिक खेती के लिए उपयोग किया जा सकेगा। खाद तैयार करने वो वरिष्ठ नागरिक राजीव अरोड़ा बताते हैं कि अगर इसी तरह अन्य सोसायटी में खाद तैयार किया जाए तो कचरे को फेंकने की बड़ी समस्या को हल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वेस्ट से बेस्ट बनाने में सफलता मिली है। आगे अन्य सोसायटी में भी इसको सफल बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

हजारों टन कचरा लैंडफिल होने से बच जाएगा
एक सोसायटी से ही प्रति महीने कई टन कचरा लैंडफिल साइट पर जाने से बच रहा है। खाद बनाने की प्रक्रिया सभी सोसायटी में लागू होने पर प्रति महीने हजारों टन कचरा लैंडफिल साइट पर नहीं जाएगा। गीले कचरे से खाद बन जाएगी और अन्य कचरे को रिसाइक्लि किया जा सकेगा।

पर्यावरणीय नुकसान बचेगा
कचरा फेंककर सिर्फ एक खाली जगह को ही डंपिंग साइट के रूप में विकसित नहीं करते, बल्कि इससे पर्यावरण को भी कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं। अगर कचरे को पहले चरण में ही पृथक कर उससे गीले सूखे कचरे को अलग कर दिया जाए तो इससे डंपिंग साइट पर कचरा नहीं पहुंचेगा और पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा।

खाद आयात कम होगा
गीले कचरे से खाद बनाने पर देश में फसल उगाने के लिए ऑर्गेनिक खाद की उपलब्धता बढ़ जाएगी। अभी तक देश में खेती में उपयोग होने वाले केमिकल खाद विदेशों से आयात होते हैं। इसकी जगह जैविक खाद का उपयोग करने पर मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और पौष्टिक अनाज पैदा होगा।