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गर्भवतियों को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में नहीं भरोसा

कोटा में इलाज के दौरान लापरवाही की वजह से चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। कोटा में हुए दुखद हादसे के बाद भिवाड़ी जिला अस्पताल की पड़ताल की गई।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

May 12, 2026

bhiwadi

प्रति महीने सिर्फ दर्जनों में ही हो रहे नवजात के जन्म

भिवाड़ी. कोटा में इलाज के दौरान लापरवाही की वजह से चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। कोटा में हुए दुखद हादसे के बाद भिवाड़ी जिला अस्पताल की पड़ताल की गई। पड़ताल में सामने आया कि यहां प्रतिदिन ओपीड़ी में आठ सौ से एक हजार मरीजों का पंजीयन होता है लेकिन गर्भवती महिलाओं के सामान्य प्रसव और सीजेरियन की संख्या बहुत कम है, कई बार प्रसव संख्या बढ़ाने के निर्देश उच्चाधिकारियों ने दिए हैं लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि एक तरफ शहर के अन्य अस्पतालों में प्रति महीने हजारों की संख्या में सीजेरियन और सामान्य प्रसव हो रहे हैं, वहीं भिवाड़ी जिला अस्पताल में यह संख्या सैकड़ों में भी नहीं पहुंच रही है। यहां इलाज को आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को कहीं न कहीं विश्वास का अभाव है, जिसकी वजह से वह निजी अस्पताल में जाकर गर्भावस्था में इलाज कराते हैं।

ये है प्रसव संख्या
जिला अस्पताल के लेबर रूम में जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रेल में क्रम अनुसार 11, 10, आठ, और छह सीजेरियन प्रसव हुए, इसी तरह क्रम अनुसार 102, 62, 55 और 56 सामान्य प्रसव हुए हैं। ऑपरेशन थियेटर में मार्च में 49 सर्जरी की गई हैं जिसमें छह ऑर्थो, 16 आंखों और 12 ईएनटी की हुई हैं। ऑपरेशन थियेटर में अप्रेल में 58 सर्जरी हुई हैं जिसमें सात ऑर्थो, 12 आंखों की और 19 ईएनटी की हुई हैं। इस तरह आंकड़ों से समझा जा सकता है कि जिला अस्पताल में एक तरफ सामान्य रोगियों की संख्या प्रतिदिन एक हजार के आसपास रहती है, वहीं कुछ जटिल बीमारी और सर्जरी होने पर बहुत कम रोगियों को ही इलाज मिलता है।
प्रसव संख्या बढ़ाने हुए प्रयास
जिला अस्पताल में मई 2024 में एक बार तत्कालीन कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रसव संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। जुलााई अगस्त और सितंबर 2024 में जिला अस्पताल की प्रसव संख्या सौ के अंक को पार करती रही लेकिन अब फिर दहाई का अंक ही रह गया है जैसा कि पूर्व में रहता था। निरीक्षण में कलक्टर ने पाया कि जिला अस्पताल में मासिक प्रसव संख्या बहुत कम है। मई 2024 में मात्र 39 प्रसव हुए थे, जबकि भिवाड़ी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां लाखों मजदूर परिवार रहते हैं। इस पर कलक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला अस्पताल में प्रसव संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद आगामी कुछ महीने में प्रसव संख्या सौ के आंकड़े को पार कर गई थी। प्रसव में वृद्धि के लिए जहां से शुरूआत की गई थी, जिला अस्पताल में वही स्थिति दोबारा देखने को मिल रही है।

आशा सहयोगिनी को दिए थे लक्ष्य
कलक्टर निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन ने प्रसव संख्या को बढ़ाने के लिए आशा सहयोगिनी के साथ बैठक कर, प्रसव संख्या बढ़ाने की रणनीति तैयार की थी। आशा हर गली मोहल्ले में जाती हैं, गर्भवती महिलाओं को लगने वाली टीके सहित अन्य उपचार की सलाह देती हैं। इसलिए उन्हें गर्भवतियों को जिला अस्पताल लाकर प्रसव के लिए समझायश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बड़ा औद्योगिक क्षेत्र
भिवाड़ी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। सरकारी आंकड़ों में यहां की आबादी का जो रिकॉर्ड है, असल में स्थिति उससे उल्टी है। कलक्टर निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल ने प्रसव संख्या को भले ही बढ़ाया था लेकिन यह उस स्थिति में नहीं पहुंची जो कि होना चाहिए था। उद्योग क्षेत्र में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल है। वहां भी महीने में होने वाले प्रसव की संख्या अधिक होती है। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल में प्रसव की संख्या को और भी अधिक संख्या में बढ़ाया जा सकता है।

ईएसआईसी की हालत खराब
उद्योग क्षेत्र में मजदूरों और गर्भवतियों के इलाज की मुख्य जिम्मेदारी ईएसआईसी अस्पताल की है। यहां पर केंद्र सरकार का 50 बेड का अस्पताल है लेकिन इसकी स्थिति से मजदूर वर्ग को इलाज में कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस तरह उद्योग क्षेत्र में श्रमिक वर्ग के साथ इलाज के नाम पर धोखा हो रहा है। यहां करोड़ों रुपए का भवन और लाखों रुपए के उपकरण कबाड़ हो रहे हैं, उनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।

प्रसव संख्या को बढ़ाने के प्रयास निरंतर किए जाते हैं। भिवाड़ी में आबादी बाहर की है, गर्भवती टीकाकरण और इलाज अस्पताल में कराती हैं और प्रसव के समय अपने राज्य में चली जाती हैं।
डॉ. सागर अरोड़ा, पीएमओ