
पेयजल के लिए कारगर नहीं हुई 78 करोड़ की योजना 15 हजार कनेक्शन का लक्ष्य अभी तक हुए सिर्फ 9057
भिवाड़ी. आवासीय क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए 78 करोड़ की योजना भी कारगर सिद्ध नहीं हुई है। 15 हजार कनेक्शन देने का लक्ष्य था, जिसमें से अभी तक 9057 घरों में पेयजल कनेक्शन हुए हैं, जबकि भिवाड़ी में आवासों की संख्या बहुत अधिक है। भिवाड़ी गांव सहित कुछ गांव तो ऐसे हैं जिनमें अभी भी पेयजल लाइन से कनेक्शन तक नहीं हुए हैं। घरों के बाहर प्लास्टिक पाइप में टोंटी तक नहीं है, जब पेयजल आपूर्ति होती है तब पानी सडक़ों पर फैलकर नालियों में बहकर बर्बाद होता है। क्षेत्र में जलापूर्ति करने के लिए 78 करोड़ की एनसीआरपीबी, अमृत योजना से 128 ट्यूबवेल, लाइन बिछाने, 24 उच्च जलाशय का निर्माण कराया गया। मीटरिंग से 155 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से जलापूर्ति होती है। नगर परिषद के ग्रामीण क्षेत्र में बोरिंग से आपूर्ति हो रही है, यहां पर अभी भी कनेक्शन नहीं हुए हैं।
पानी हो रहा बर्बाद
भिवाड़ी गांव के धारा ङ्क्षसह ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी बोरिंग से सीधी आपूर्ति होती है। कनेक्शन नहीं है। पाइप सडक़ पर होता है, घर की टंकी, बर्तन भर जाने पर पानी नालियों में बहकर व्यर्थ होता है। बोरिंग खराब होने पर ग्रामीण मिलकर सही कराते हैं। सडक़ पर पानी के जो पाइप छोड़ रखे हैं, अगर इनमें टोंटी लग जाए या टेपिंग हो जाए तो पानी की बर्बादी रुक जाएगी।
निजी बोरिंग पर आश्रित
क्षेत्र में मिलकपुर, सैदपुर, सांथलका, आलमपुर सहित अन्य गांव के ग्रामीण आज भी निजी बोरिंग पर आश्रित हैं। जिन गांव में श्रमिक कॉलोनियां हैं, उनमें अधिकांश की निजी बोरिंग है। सांथलका निवासी सुबे ङ्क्षसह बताते हैं कि गांव में अभी तक पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं है। ग्रामीण विभाग के भरोसे नहीं रह सकते, गांव में बाहरी आबादी बहुत अधिक है, पेयजल की जरूरत अधिक है, विभाग का सिस्टम यहां कारगर नहीं है।
पार्क की बोरिंग पर निर्भर
आरएचबी सेक्टर चार निवासी आशीष दीक्षित ने बताया कि उच्च जलाशय से घरों में पानी नहीं आता है। सेक्टर की कई गलियों में स्थित मकान जलापूर्ति के लिए पार्क में लगी बोरिंग पर आश्रित बने हुए हैं। अभी भी पुराना कनेक्शन चल रहा है। इस तरह जलदाय विभाग ने जलापूर्ति को हाईटेक करने के लिए जितना पैसा खर्च किया, उसका लाभ आमजन को नहीं मिल रहा है। अभी भी कई जगह लाइन में गड़बड़ है, जिसकी वजह से कनेक्शन होने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंचता। पार्क की बोरिंग खराब होने पर पेयजल की किल्लत खड़ी हो जाती है।
जलापूर्ति को बेहतर करने के प्रयास रहते हैं, अधिकांश सेक्टर में नई लाइन से कनेक्शन हो चुके हैं। मीटर भी लगाए जा चुके हैं। जिन सेक्टर में उच्च जलाशय से पानी नहीं पहुंचता, वहां तकनीकि कमी को दूर कराया जाएगा।
धर्मेंद्र यादव, एक्सईएन, जलदाय विभाग
Updated on:
15 May 2026 07:07 pm
Published on:
15 May 2026 07:07 pm
