बासमती जीआई-टैग की लड़ाई, मध्यप्रदेश सरकार कर रही कानूनी संघर्ष के लिए दस्तावेजों को पुख्ता
भोपाल. प्रदेश सरकार बासमती के जीआइ टैग की लड़ाई में मजबूत साक्ष्यों के साथ कोर्ट में दावा पेश करेगी। इसी क्रम में वर्ष-२०१४ में पाकिस्तान ने बासमती जीआई टैग का विरोध किया था, तब कानूनी लड़ाई में पाकिस्तान की ओर से पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए गए थे। भारत की ओर से जो साक्ष्य दिए गए, उनमें मध्यप्रदेश के साक्ष्य भी शामिल थे। वर्ष-२०१६ के बाद दोनों देशों ने ब्रांड बासमती के लिए काम करना तय किया था। इसलिए मध्यप्रदेश के तथ्यों में इन बिंदुओं को भी शामिल किया गया है।
बासमती जीआई-टैग को लेकर एपीडा के मध्यप्रदेश के दावे को खारिज करने पर प्रदेश सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट से स्टे लिया है। अब अगली सुनवाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रत्येक उन तथ्यों को वापस देखा जा रहा है, जो कोर्ट में मध्यप्रदेश के दावे को मजबूत कर सकते हैं।
इसलिए सरकार ने इसका एक प्रेजेंटेशन भी तैयार किया है। इसमें बासमती के प्राचीन तथ्यों के साथ पाकिस्तान के दावे और उसके बाद साक्ष्य देने में विफल हो जाने के तथ्यों को भी लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान के साथ तथ्यों की लड़ाई में भारत के पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के तथ्य भी महत्वपूर्ण थे। बावजूद इसके मध्यप्रदेश के कानूनी संघर्ष में इन तथ्यों को शामिल किया है।
ये था मामला
दरअसल 2014 में पाकिस्तान के लाहौर स्थित बासमती उत्पादक संघ (बीजीए) ने भारत के चेन्नई स्थित इंटलेक्चुुअल प्रोपर्टी अपैलेट बोर्ड (आईपीएबी) में अपील दायर करके मध्य प्रदेश को यह टैग दिए जाने का विरोध किया है। बाद में साक्ष्यों के मामले में पाकिस्तान का बीजीए पिछड़ गया था। मध्यप्रदेश ने अपने तथ्यों में इसका उल्लेख किया है।
विदेशों में निर्यात
विदेशों में निर्यात होने वाले बासमती में मध्यप्रदेश का १० फीसदी हिस्सा है। इनमें सबसे ज्यादा अमरीका और यूरोप जाता है। ईरान भी बड़ा ग्राहक है। यहां से सालाना ५९२९४ क्विंटल बासमती निर्यात होता है।
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