
Bhopal news: मध्यप्रदेश में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज के लिए जेब से खर्च करना पड़ सकता है। आयुष्मान योजना से बाहर किए गए निजी अस्पतालों में से 21 अस्पतालों को एनएबीएच प्रमाणपत्र लेने के लिए 20 दिन की मोहलत मिली है। इनमें भोपाल के 10 अस्पताल शामिल हैं। हालांकि, दोबारा योजना में शामिल होने तक इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत इलाज नहीं हो सकेगा। मरीजों को दूसरे संबद्ध अस्पतालों का विकल्प तलाशना पड़ सकता है। निजी अस्पताल संचालकों की शासन से चर्चा के बाद 21 अस्पतालों को प्रमाणपत्र लेने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। भोपाल के 10 के अलावा इनमें ग्वालियर के आठ और इंदौर के तीन निजी अस्पताल हैं। मोहलत मिलने से आयुष्मान के तहत इलाज की अनुमति अपने आप बहाल नहीं होगी।
तीन अन्य अस्पतालों को इसलिए बाहर किया गया, क्योंकि वे पिछले छह महीने से एमपी-एबीएन के तहत मरीजों का इलाज नहीं कर रहे थे। इनमें भोपाल के दो और इंदौर का एक अस्पताल शामिल है। इस तरह 67 अस्पतालों की कार्रवाई के कारण स्पष्ट हैं: बाकी पांच के कारण उपलब्ध जानकारी में दर्ज नहीं हैं।
एमपी-एबीएन के तहत प्रदेश के 1,953 सरकारी और निजी अस्पताल इलाज करते हैं। इनमें 813 निजी अस्पताल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में कुल 423 निजी अस्पताल हैं।
मरीजों के लिए सलाहः इलाज से पहले अस्पताल की आयुष्मान योजना में मौजूदा संबद्धता की पुष्टि करें।
एनएबीएच यानी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का प्रमाणन। निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने पर 60 निजी अस्पताल योजना से बाहर हुए। इनमें भोपाल के 27, इंदौर के 17, ग्वालियर के नौ और जबलपुर के सात अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल के तीन अस्पतालों ने प्रमाणपत्र संबंधी दस्तावेज जमा नहीं किए, जबकि एक अस्पताल में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई हुई। इसका सीधा असर ऐसे अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को भुगतना पड़ सकता है। मरीजों को इसकी जानकारी लेकर ही ऐसे अस्पतालों में उपचार के लिए जाना चाहिए।