
Bhopal news: फर्जी पासपोर्ट पर बांग्लादेशियों के विदेशों तक यात्रा का मामला अब मध्यप्रदेश के डबरा से भोपाल तक फैलता नजर आ रहा है। गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित एक बौद्ध मठ के पते से 40 पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है, गिरोह बांग्लादेश से भारत आए लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक बनाता था। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार कराकर भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाते थे। फर्जी पासपोर्ट के जरिए कई लोग थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान तक की यात्रा कर चुके है।
एसटीएफ की जांच में आया है कि नेटवर्क की जड़े असम, कोलकाता और पश्चिम बंगाल तक फैली हैं। अब तक भोपाल और डबरा के पतों से 70 से ज्यादा पासपोर्ट संदिग्ध तरीके से जारी होने की जानकारी मिली है। इस केस की जांच के लिए एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम असम रवाना हो गई है।
जांच में सबसे पहले डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से 30 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भोपाल के गोविंदपुरा अन्ना नगर स्थित मठ का पता जांच के दायरे में आया। यहां से 40 लोगों के नाम पर पासपोर्ट मिले हैं। ये पासपोर्ट 2021, 2022 और 2023 के दौरान जारी हुए थे।
एसटीएफ एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया, गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में नेटवर्क के दूसरे लोगों और दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई गई है।
फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्रा करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की जानकारी मिली है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन यात्राओं के पीछे केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल था या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी सक्रिय है।
गिरोह पहले बांग्लादेश से आए लोगों की पहचान और जरूरी जानकारी जुटाता था। इसके बाद उनके नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पते और पहचान का रिकॉर्ड तैयार कर पासपोर्ट के लिए आवेदन कराया जाता था।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पासपोर्ट जारी होने से पहले होने वाले पुलिस और स्थानीय सत्यापन को लेकर है। एक ही मठ व विहार के पते से दर्जनों लोगों के पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन में यह गड़बड़ी में नहीं आई, इसकी भी पकड़ी जयरही है। आसटीएफ और पुलिस स्थानीय सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका भी जांच रही है।
गिरोह का मास्टरमाइंड असम में रहता था। वह ऐसे लोगों के संपर्क में था, जो कई साल पहले बांग्लादेश से भारत आए और अलग-अलग शहरों में बस गए थे। एसटीएफ असम सहित अन्य राज्यों में जाकर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, दस्तावेज बनाने वालों और विदेश यात्रा के कनेक्शन की जानकारी जुटाएगी।