मध्यप्रदेश में पांचवां वेतनमान पाने वाले शासकीय कर्मचारियों के दिन फिरने वाले हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब उन्हें एक वेतनमान और बढ़ाने की तैयार
भोपाल। मध्यप्रदेश में पांचवां वेतनमान पाने वाले शासकीय कर्मचारियों के दिन फिरने वाले हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब उन्हें एक वेतनमान और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। वे भी कहते हैं कि जब केंद्र की मोदी सरकार अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे रही है, मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भी साढ़े चार लाख कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे रही है तो हम क्यों पीछे रहें। सभी कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें पांचवां वेतनमान से सीधे सातवें वेतनमान दिया जाए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के पंचायत सचिवों को छठा वेतनमान दिए जाने की घोषणा कई बार कर चुके हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर भी बताया था कि प्रदेश के पंचायत सचिवों को छठा वेतनमान देने का फैसला हुआ है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से पंचायत सचिवों में वेतनमान बढ़ने की आस बढ़ी है।
तो मिल सकता है सातवां वेतनमान
सूत्रों के मुताबिक शिवराज सरकार धीरे-धीरे अपने कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के बराबर वेतन देने के मूड में है, हालांकि यह फैसला भी चुनाव से पहले तक किया जा सकता है। हालांकि पांचवें वेतनमान से सीधे 7वां वेतनमान नहीं दिया जा सकता, लेकिन सरकार की मंशा है कि वे अपने सभी कर्मचारियों को सातवां वेतनमान के स्लेब में ले आए।
पंचायत मंत्री ने नहीं दी जानकारी
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पंचायत मंत्री ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। सत्र के चलते पंचायत सचिवों के वेतनमान पर कोई बात नहीं करने पर कर्मचारियों में आक्रोश है। प्रदेशभर से पंचायत सचिवों की आवाज उठ रही है कि सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करें, नहीं तो वे आगे की रणनीति बनाएंगे।
तो घोषणा झूठी थी
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सिहोरा विधायक नंदनी मरावी के प्रश्न पर पंचायत मंत्री ने मुख्यमंत्री की ही घोषणा को झूठा साबित कर दिया। जैसा की सबको मालूम है कि मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई को सुजालपुर की अकोदिया मंडी में पंचायत सचिवों को छटवा वेतनमान देने की घोषणा की थी। जो समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बनी थीं। इसके बाद सीएम ने रायसेन और रतलाम के जावरा में 29 नवंबर को विकास यात्रा के दौरान भी इसी प्रकार की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर इसका जिक्र भी किया था। प्रदेश के 23 हज़ार से अधिक पंचायत सचिवों में इस बात का गुस्सा है। इसलिए वे आंदोलन की रणनीति पर काम कर रहे हैं।