भोपाल

लेखक की पहचान उसके रचनाकर्म से होती है

हिन्दी एवं मैथिली की वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री श्रीमती उषाकिरण खान को स्मरण करने के लिए गांधी भवन में आयोजित सभा में वरिष्ठ साहित्यकार विजय बहादुर सिंह ने कहा कि लेखक की रचानाओं को स्मृतियों में रखकर उसे याद करना चाहिए।

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Mar 17, 2024

भोपाल. हिन्दी एवं मैथिली की वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री श्रीमती उषाकिरण खान को स्मरण करने के लिए गांधी भवन में आयोजित सभा में आज वरिष्ठ साहित्यकार विजय बहादुर सिंह ने कहा कि लेखक की रचानाओं को स्मृतियों में रखकर उसे याद करना चाहिए। लेखक की पहचान उसके रचनाकर्म से होती हैं। बहुत कम लेखक होते हैं, जिनका व्यक्तित्व भी अनुकरणीय होता हैं उषाकिरण जी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व दोनों अनुकरणीय है। उषाकिरण जी लेखनी एवं व्यक्तित्व दोनों पर भारतीयता की छाप है। उन्होंने अपनी जिंदगी में स्त्रियिं की स्थिति को अनुभव किया है, जिसे उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है।

स्मृति सभा की शुरुआत कबीर गायन से किया गया। सीमा बजाज ने कबीर की रचनाओं को प्रस्तुत किया। अपने वीडियो संदेश में नम्रता कार्तिक ने उषाकिरण के साथ के अपनी यादों को साझा किया। पत्रकार निवेदिता ने बताया कि साहित्य से अलग अन्य विषयों में भी उनकी गहरी रूचि थी। वरिष्ठ रंगकर्मी संजय उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने कई नाटक भी लिखे थे, जिसका मंचन उन्होंने कई बार किया। एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही. ने बताया कि कई आंदोलनों में वे साथ रही हैं। हाशिये के लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना थी। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बताया कि वे देश के सभी गांधावादी आंदोलनों को समर्थन देती थी। वरिष्ठ पत्रकार फैजल ने बताया कि अगनहिंडोला उनकी बेहतरीन रचनाओं में से एक है, जिसे जरूर पढ़ना चाहिए। साहित्यकार मलय जैन ने बताया कि वे नए रचनाकारों को हौंसला देती थीं। साहित्यकार जिया फारूखी ने बताया कि उनकी रचनाओं में मार्मिकता की झलक मिलती है। साहित्यकार श्रद्धा जोशी ने बताया कि उषाकिरण जी नए रचनाकारों के साथ बहुत सहज व्यवहार करती थी। उषाकिरण खान ने आयाम संगठन का गठन किया था। उससे जुड़ी रानी ने बताया कि वे लिखने के साथ-साथ पढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं।

इस सभा में उषाकिरण की पुत्री अनुराधा शंकर, पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार, एकता परिषद के रनसिंह परमार, रघुराज सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार ध्रुव शुक्ल, शैलेन्द्र शैली, अनीष, आशा मिश्रा, सविता वाजपेयी, माधुरी सहित कई वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित हुए। सभा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने किया।

Published on:
17 Mar 2024 12:42 am
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