पिछले तीन साल में एआइ बेस्ड मरीजों का इलाज में 20 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने मध्यप्रदेश के डॉक्टरों की कई उलझनों को आसान कर दिया है। मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है जहां के सरकारी और निजी अस्पतालों में एआइ बेस्ड मरीजों के इलाज में पिछले तीन सालों में 20 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है। यहां मरीजों के पंजीयन से लेकर आइसीयू में नजर रखने जैसे कार्य एआइ के जरिए हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं में एआइ का बाजार 14.6 अरब डॉलर से बढ़कर 2028 तक 102.7 डॉलर होने की उम्मीद है।
एम्स में एआइ बेस्ड 3 डी प्रिंटर
एम्स भोपाल में गंभीर सर्जरी और ऑपरेशन से पहले एआई बेस्ड 3डी प्रिंटर बड़ी भूमिका निभा रहा है। आर्टिफिशियल अंग तैयार किए जाते हैं। नसों से लेकर मांसपेशियों की बनावट और उसकी बारीकियों को समझते हुए जटिल सर्जरी आसान हो गई है।
हमीदिया और एम्स में थर्मल इमेजिन और एआई ब्रेस्ट कैंसर की जांच जल्द ही शुरू होगी। इस तकनीक से प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी जोड़ा जाएगा। जिससे प्रदेश में तेजी से बढ़ते कैंसर मरीज का निजात मिल सकेगी। प्रदेश में एक लाख महिलाओं में 897 महिलाओं को ब्रैस्ट कैंसर की प्रॉब्लम है।
एआइ और स्कैनर टूल सॅाफ्टवेयर से यह भी आसान हो गया कि ट्रीटमेंट के बाद कैसे दिखेंगे। एम्स में चश्मा, हेयर स्टाइल, दांत औऱ ड्रेसिगं सेंस से जुड़े सुझाव लिए जा रहे हैं।
सूबे का स्वास्थ्य विभाग मानसिक मरीजों के लिए एआई बेस्ड मेंटल हेल्थ असेसमेंट एप बना रहा है ताकि मनोचिकित्सकों के पास जाने में झिझक महसूस करने वाले घर बैठे अपनी मानसिक स्थिति जांच सकें। एम्स में मानसिक रोगियों के लिए मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के जरिए डिप्रेशन के उपचार की व्यवस्था है।
सेहत की भविष्यवाणी हमीदिया में इंस्टॉल मशीन भविष्य में होने वाली बीमारियों के बारे में बता रही है। इस कियोस्क में कैंसर, मधुमेह, मेंटल हैल्थ, हार्ट समेत अन्य बीमारियों के डेटा, उनके लक्षण व केस हिस्ट्री समेत अन्य जानकारियां स्टोर हैं। चैट बॉक्स से कुछ सवालों के जवाब के बाद सेहत की जानकारी मिल रही है।