भोपाल

MP में स्टार्टअप्स की मदद लेगा पुरातत्व विभाग, ‘कारीगरों’ और ‘समूहों’ को होगा फायदा

MP News: आर्कियोलोजिकल एक्सपीरिएंस मंचों का भी विकास किया जाएगा, जहां पर्यटक आधुनिक एआर, वीआर तकनीकों के साथ प्रदेश के विरासत स्थलों का अनुभव ले सकेंगे।

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May 03, 2026
Archaeology Department (Photo Source: AI Image)

सुनील मिश्रा

MP News: मध्यप्रदेश में अब जल्द हेरिटेज आधारित उद्योगों का विकास किया जाएगा। हेरिटेज के रेप्लिका उत्पाद, हस्तशिल्प आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें कारीगरों और समूहों को जोड़कर प्रदेश में कल्चरल एंटरप्रिन्योरशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए अलग ई-कॉमर्स प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा और विरासत-आधारित उत्पादों की ब्रांडिंग कर उन्हें मार्केट भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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प्रदेश में हेरिटेज सर्किट्स का विकास करते हुए पर्यटन को आकर्षक बनाया जाएगा। आर्कियोलोजिकल एक्सपीरिएंस मंचों का भी विकास किया जाएगा, जहां पर्यटक आधुनिक एआर, वीआर तकनीकों के साथ प्रदेश के विरासत स्थलों का अनुभव ले सकेंगे। पुरातत्व विभाग इसके लिए स्टार्टअप्स की मदद लेगा। तकनीकों के साथ धरोहर और विरासतों का संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके लिए अलग पोर्टल और ऐप्स बनाए जाएंगे। इससे शोधकर्ताओं को भी मदद मिलेगी।

प्रस्ताव आमंत्रित किए गए

विभाग ने स्टार्टअप्स का एक पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय निदेशालय ने ज्ञान भारतम मिशन और विभाग से जुड़े प्रोजेक्ट्स के तहत, स्टार्टअप्स को सिस्टम इंटीग्रेटर्स, इकोसिस्टम कैटेनेटर्सऔर कैटालिस्ट्स के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह प्रस्ताव 7 मई को खोले जाएंगे। विभाग द्वारा स्टार्टअप्स को अपने साथ जोड़कर निर्धारित इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट्स, अनुसंधान एवं विकास में मदद, विरासत का डिजिटलीकरण, प्रशासनिक सहायता प्रणालियों का विकास और इंक्यूबेशन में मदद ली जाएगी।

यह काम करेंगे स्टार्टअप…

-सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सुरक्षा

-मूर्त और अमूर्त विरासत का दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण

-सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर क्षमता निर्माण और ज्ञान का आदान-प्रदान

-विरासत प्रबंधन के लिए वैश्विक केस स्टडीज, टूलकिट और मानकों को अपनाना

-सांस्कृतिक अभियान, कार्यक्रम और आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन

-राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू और सहयोगात्मक ढांचे का विकास

-संग्रहालयों, स्मारकों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक उद्योगों से संबंधित योजनाएं बनाना।

-स्टार्टअप्स डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व अनुसंधान संस्थान और मध्यप्रदेश विरासत विकास न्यास के साथ मिलकर काम करेंगे।

-पुरातात्विक अनुसंधान, उत्खनन और पुरातात्विक अध्ययन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग

-विरासत विकास और बुनियादी ढांचा सुदृढ़ किया जाएगा

-पुरातत्व और धरोहरों के संबंध मैं ज्ञान प्रसार और प्रशिक्षण

-मौजूदा और नई हेरिटेज संपत्तियों का सर्वेक्षण, पहचान और प्रलेखन किया जाएगा

-उत्खनन में सहायता और पुरातात्विक क्षेत्र-कार्य

-पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण, जीर्णोद्धार और परिरक्षण योजना पर काम

-संग्रहालय क्यूरेशन, डिजिटलीकरण और प्रदर्शनी का आधुनिक डिजाइन बनेगा।

-स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, मेंटरिंग और एक्सीलरेशन प्रोग्राम चलाए जाएंगे।

रिसर्च में इस तरह करेंगे मदद

-अकादमिक और एप्लाइड रिसर्च प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे।

-डेटा संग्रह, विश्लेषण और डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम विकसित करेंगे।

-डिजिटल रिपॉजिटरी, अभिलेखागार और ज्ञान मंचों का निर्माण करेंगे।

-नीति अनुसंधान, बेंचमार्किंग और वैश्विक अध्ययन की व्यवस्था करेंगे।

तकनीक से ऐसे बदलाव

चयनित स्टार्टअप विभाग और धरोहरों का एंड-टू-एंड आइटी सिस्टम इंटीग्रेशन और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट करेंगे। क्लाउड-आधारित आर्काइवल सिस्टम और डिजिटल एसेट मैनेजमेंट किया जाएगा। साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेस और इंटरऑपरेबिलिटी समाधान में भी मदद करेंगे। पर्यटकों के लिए डिजिटल भुगतान, टिकटिंग और रेवेन्यू सिस्टम का विकास करेंगे। सरकारी वित्तीय प्रणालियों के साथ इसका एकीकरण किया जाएगा।

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Published on:
03 May 2026 08:16 am
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