विटामिन डी की कमी से एक बड़ी आबादी जूझ रही है। लोग मशीनी युग में जी रहे हैं। वातानुकूलित दफ्तरों में ज्यादा से ज्यादा समय बिताते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप ये समस्या एक विकराल रूप लेती जा रही है।
भोपाल/ नए दौर की भगदौड़ में बने रहने के कारण लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आ गया है। दिनचर्या में आए बिगाड़ और खानपान में बदलाव के कारण एक बड़ी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। इस मशीनी युग के कारण ज्यादातर लोग वातानुकूलित दफ्तरों में दिनभर एक स्थान पर बैठकर काम करते हैं। इसलिए ये लोग धूप के संपर्क से दूर हो गए हैं। यही कारण है कि, लोगों में ये समस्या ज्यादा देखी जा रही है। अकसर लोग इस समस्या से निपटने के लिए कई महंगी और गरम दवाओं का सेवन करते हैं, जिसके अपने कई घातक परिणाम सामने आते हैं। हालांकि, इस समस्या को कुछ घरेलू चीजों से ही ठीक किया जा सकता है।
भोपाल के डाक्टर प्रवीण चौधरी कहते हैं कि, आजकल ज्यादातर लोगों का मिजाज ही बन गया है कि, किसी भी समस्या में सिर्फ दवा लेने पर ही उस समस्या का निदान होता है। हालांकि, ये बात कुछ हद तक दुरुस्त भी है, लेकिन इस समय लोगों की बड़ी समस्या बनती जा रही विटामिन डी की कमी कुछ प्राकृतिक तरीकों से भी पूरी की जा सकती है। आइये जानते हैं कैसे...।
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-15 मिनट की धूप
दिनभर वातानुकूलित ऑफिसों में काम करने वाले लोग या सुबह से शाम तक घर में रहकर काम करने वाली महिलाओं में ये समस्या काफी तेजी से बढ़ती है। इसका मुख्य कारण ये है कि, ये लोग सूर्य की किरणों के संपर्क में नहीं रहते। इसपर विशेषज्ञ मानते हैं कि, हर व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम पंद्रह मिनट की धूप लेना चाहिए। ये विटामिन डी की पूर्ति का सबसे अच्छा सोर्स है।
बच्चों को रिकेट्स का खतरा
विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स और सूखा रोग, साथ ही बड़ों में ऑस्टीओप्रोसिस का खतरा बढ़ाती है। विटामिन डी शरीर को कैल्शियम सोखने की क्षमता देता है। इसलिए मानव शरीर को विटामिन डी लेने के लिए इन खाद पदार्थों का सेवन दवाओं के मुकाबले एक बेहतर विकल्प है।
फार्टफाइड फूड्स है जरूरी
फूड प्रोसेसिंग के वक्त जिसके शरीर से विटामिन और मिनरल की कमी हो जाती है, वो कमी सबसे तेजी से फार्टफाइड फूड्स द्वारा पूरी होती है। यह फूड अन्य खाद्य की पौष्टिकता बढ़ाते हैं। विटामिन डी से भरपूर फार्टफाइड फूड्स में ब्रेड, सेरल, दूध,पनीर, चीज़, सोया मिल्क और संतरे का जूस आता है।
मशरूम में होता है भरपूर विटामिन डी
मशरूम में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जैसे वाइट बटन, वाइल्ड एडिबल और चैन्ट्रल। कैल्शियम और फास्फोरस को एब्जार्ब करने में मदद करता है। सबसे ज्यादा विटामिन डी मशरूम एंड कार्डलीवर आइल में होता है।
दूध में कैल्शियम के साथ विटामिन डी
दूध पीने वालों को कैल्शियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है। रोजाना खासतौर पर सुबह नींद से जागकर नाश्ते से पहले एक ग्लास दूध पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। जिन लोगों को सीधे तौर पर दूध पीना सही नहीं लगता, वो दूध से बना दही या चीज़ खा सकते हैं।इससे शरीर को पर्याप्त पोषण तो मिलता ही है, साथ ही कैल्शियम को सोखने में भी मदद मिलती है।
अंडा और मीट से मिलता है प्रोटीन
अंडा और मीट भी विटामिन डी का अच्छा स्रोत माना जाता है। इससे अन्य प्रोटीन्स भी मिलते हैं। इसके अलावा समय-समय पर किसी डायटिशियन से आपके शरीर के मुताबिक डाइट चार्ट बनवाया जाना चाहिए।
फिश है फायदेमंद
मछली विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत होता है। मांसाहार का सेवन करने वालों के लिए मछली विटामिन डी का सबसे बढ़िया विकल्प है। कार्डलीवर आइल में भी काफी मात्रा में विटामिन डी होता है।
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ये घरेलू बातें रखें याद
-ठंड के महिनों में विटामिन डी का स्तर पर्याप्त विकसित होता रहता है। इसके लिए चलना, दौड़ना, नाचना, स्कीइंग करना आदि भी एक तरह की एक्सरसाइज है, जो विटामिन डी की कमी से बचाती है। वजन उठाना या तैरना भी एक बढ़िया व्यायाम है।
इन चीजों से बनाए रखें दूरी
-चाय या कॉफी का सेवन कम से कम करें, क्योंकि इसमें कैफीन पाया जाता है। कैफीन विटामिन डी के अवशोषण में अवरोध पैदा करता है।