भोपाल

भील समुदाय आज भी शस्त्र चलाने में नहीं करता अंगूठे का उपयोग, ये है कारण

शिक्षक दिवस के अवसर पर नाटक 'एकलव्य की गुरु दक्षिणा' का गांधी भवन में मंचन

2 min read
Sep 05, 2021
भील समुदाय आज भी शस्त्र चलाने में नहीं करता अंगूठे का उपयोग, ये है कारण

भोपाल। चिल्ड्रंस थिएटर अकादमी की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर नाटक 'एकलव्य की गुरु दक्षिणा' का मंचन गांधी भवन में किया गया। इसके लेखक प्रेम गुप्ता हैं, जबकि निर्देशन वैशाली गुप्ता ने किया है। नाटक में 35 बाल कलकारों ने अभिनय कौशल दिखाया। प्रस्तुत कथानक महाभारतकाल की कथाओं में से एक है। गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत महाभारत की ये कथा एक अनुपम उदाहरण है। नाटक में दिखाया गया कि गुरु द्रोणाचार्य कौरव और पाण्डवों के हस्तिनापुर राज्य के धनुर्विद्या सिखाने के लिए राजगुरु नियुक्त किए जाते हैं।

द्रोणाचार्य की ख्याति शस्त्र सीखाने के लिए दूर-दूर तक फैली हुई थी। एक दिन व्याधराज का पुत्र एकलव्य द्रोणाचार्य से शस्त्र विद्या सीखने के लिए उनके पास आता है। द्रोणाचार्य राजबंधन में बंधे होने के कारण उसे इंकार कर देते हैं। एकलव्य ने द्रोणाचार्य को परोक्ष गुरु मानकर अपने राज्य में उनकी प्रतिमूर्ति बनाकर धनुर्विद्या का अभ्यास प्रारंभ कर देता है। कालांतर में उन्हें पता चलता है कि एकलव्य मेरी प्रतिमूर्ति बनाकर धनुर्विद्या का अभ्यास करता हुआ इस संसार में अप्रितम योद्धा बन चुका है। वह दक्षिणा में दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लेते हैं। मध्यप्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां आज भी एकलव्य की जाति मौजूद है जिसे भीलाला (भील) कहते हैं। यह जाति आज भी दाहिने हाथ के अंगूठे का शस्त्र विद्या में उपयोग नहीं करती है।

कथक के तकनीकी पक्षों से दर्शकों को कराया रू-ब-रू
संस्कृति विभाग की एकाग्र शृंखला गमक में रविवार को अवनि शुक्ला और साथियों ने शास्त्रीय कथक नृत्य की प्रस्तुति दी तो उज्जैन की माधुरी बर्वे ने उपशास्त्रीय गायन पेश किया। अवनि ने कथक के तकनीकी पक्ष में तीन ताल में आमद, तोड़े, टुकड़े, परण, तत्कार आदि पेश किए। ठुमरी नृत्य से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। प्रस्तुति में साथी कलाकार ईशानी भट्ट, सानिका साठे, अरण्या नागर, अनज्र्ञा गौड़ और विधि जोशी शामिल रहीं। तबले पर अरुण कुशवाह, पढ़ंत पर प्रतिभा रघुवंशी और हारमोनियम पर आस्तिक उपाध्याय ने संगत दी। दूसरी प्रस्तुति उपशास्त्रीय संगीत की रही, माधुरी ने राग रागेश्री छोटा ख्याल में निबद्ध रचनाओं की प्रस्तुति दी। भजन बिना सांवरो से नैना लगे... से अपनी वाणी को विराम दिया। इनके साथ तबले पर अनुराग गोमे और हारमोनियम पर तनया गंधे ने संगत की।

Published on:
05 Sept 2021 11:51 pm
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