Bhopal Traffic Police - दिल्ली के अस्पताल के डॉक्टरों की टीम सुबह 8 बजे भोपाल पहुंची, यातायात पुलिस ने फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीडि़त को पहुंचाया दिल्ली
Bhopal Traffic Police - भोपाल के लोगों ने शुक्रवार को खासी दरियादिली दिखाई। एक गंभीर मरीज को इलाज के लिए जल्दी दिल्ली पहुंचाने के लिए लोग सड़क खाली करते चले गए जिससे एंबुलेंस सरपट दौड़ती रही। मरीज सत्यभान सिंह (54) हार्ट और फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीडि़त थे और उनका इलाज भोपाल के निजी अस्पताल में चल रहा था। बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के निजी अस्पताल रेफर किया गया। यातायात पुलिस ने गंभीर रूप से बीमार मरीज को समय पर दिल्ली पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया।
दिल्ली के अस्पताल के डॉक्टरों की टीम सुबह 8 बजे भोपाल पहुंची
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के अस्पताल के डॉक्टरों की टीम सुबह 8 बजे भोपाल पहुंची। इन्हें यातायात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कम समय में संबंधित अस्पताल तक पहुंचाया।
विशेष एंबुलेंस से ले गए एयरपोर्ट
सुबह 11.40 बजे मरीज को विशेष एंबुलेंस से अस्पताल से राजा भोज एयरपोर्ट ले जाया गया। 24 किमी लंबे मार्ग पर ट्रैफिक के बावजूद पुलिस ने निर्बाध यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे एंबुलेंस कम समय में एयरपोर्ट पहुंच सकी। वहां से मरीज को एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली रवाना किया गया। पूरी व्यवस्था में भोपाल यातायात पुलिस के 60 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इधर भोपाल के हमीदिया अस्पताल में प्रदेश की दूसरी सरकारी बोनमैरो बीएमटी यूनिट का इंतजार है। यहां उपकरण के टेंडर ही जारी नहीं हुए हैं। यूनिट खुलने में यह देरी थैलेसीमिया पीडि़तों का दर्द बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि हमीदिया अस्पताल में 16 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही मध्यप्रदेश की दूसरी सरकारी बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट इस साल भी शुरू नहीं हो पाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने पहले इस वर्ष इलाज शुरू होने की उम्मीद जताई थी, लेकिन उपकरणों की खरीदी का टेंडर अब तक जारी नहीं होने से मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ब्लॉक-2 की चौथी मंजिल पर बन रही यह हाईटेक यूनिट अब 2026 के अंत या 2027 शुरू होने की संभावना है। इससे थैलेसीमिया सहित कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों निराशा हुई है।
मॉडर्न सुविधाओं का दावा: बीएमटी यूनिट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया जा रहा है। यहां एचईपीएल फिल्टर युक्त आइसोलेशन रूम, एडवांस आइसीयू, 6 से 8 विशेष बेड, पॉजिटिव प्रेशर रूम और अत्याधुनिक इन्फेक्शन कंट्रोल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस यूनिट में थैलेसीमिया के अलावा सिकल सेल एनीमिया, ल्यूकेमिया और अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है।
हमीदिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सुनीत टंडन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। मरीजों को लाभ भी मिलने लगेगा।
वर्तमान में निजी अस्पतालों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर 25 से 30 लाख रुपए तक खर्च आता है, जबकि हमीदिया में यही इलाज डेढ़ से दो लाख रुपए में उपलब्ध हो सकेगा। प्रदेश में थैलेसीमिया के 2 हजार से अधिक पंजीकृत मरीज हैं। इनमें करीब 1800 मरीज हर महीने ब्लड ट्रांसफ़्यूजन पर निर्भर हैं। थैलेसीमिया का स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही माना जाता है, लेकिन यूनिट में देरी के कारण मरीजों को दिल्ली और मुंबई के बड़े अस्पताल जाना पड़ रहा है