भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों में हड़कंप...
भोपाल। MP में होने वाले चुनावों से ठीक पहले राज्य में इन दिनों बवाल की स्थिति बनी हुई है। जिसके चलते कई बड़े दलों को चुनाव में भारी नुकसान होने की आक्षंका जताई जा रही है।
इसी के चलते कई नेता लगातार स्थिति को शांत करने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन समाज में इतनी अशांति बनी हुई है कि अब कई जिलों में धारा 144 तक लागू करनी पड़ गई है।
ऐसे समझें पूरा मामला...
दरअसल एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से MP में आधे से ज्यादा जिलों में इसका गजब का विरोध सामने आ रहा है। एससी-एसटी एक्ट संशोधन ने जहां एक वर्ग विशेष को गुस्सा दिला दिया है, वहीं अपने उपर हो रहे इस अत्याचार की बात को सामने लाते हुए एससी-एसटी एक्ट का विरोध करते हुए 6 सितंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया है।
कई समाज आए एक साथ...
मध्यप्रदेश में क्षत्रीय महासभा, यादव महासभा, गुर्जर महासभा, वैश्य महासभा, कायस्थ महासभा, कुशवाह महासभा सहित अनेक सामाजिक संगठन इस आंदोलन के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। यह सामूहिक बैठकें करके भारत बंद को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं।
इन जिलों में धारा 144...
इस बीच सभी जिलों के कलेक्टर और एसपी को स्थिति के अनुरूप धारा 144 लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कई जिलों में धारा 144 लागू भी कर दी गई है छतरपुर जिले में धारा 144 लागू कर दी गई ,6 तारीख को होने वाले एससी ,एसटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन को लेकर कलेक्टर ने धारा 144 लगाईं है, जबकि ग्वालियर जिले में 11 सितम्बर तक सभी शस्त्र लायसेंस निलंबित किए गए हैं।
गुना में 5 तारीख से 7 तारीख दोपहर 12:00 बजे तक धारा 144 लागू की गई है| मुरैना, भिण्ड और शिवपुरी में एहतियाती तौर पर बुधवार को धारा 144 तत्काल प्रभाव से लगा दी गई है। जो 7 सितम्बर तक प्रभावी रहेगी।
दलों में हड़कंप...
सूत्रों के अनुसार इस आंदोलन की तैयारियां भी तकरीबन पूरी हो चुकी है, वहीं सरकार इन लोगों को यह समझाने में फेल रही है कि इससे किसी का कोई नुकसान नहीं होगा या इस एक्ट का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। वहीं इस आंदोलन का कोई विशेष नेता भी सामने नहीं आया है, जिसके चलते सरकार व खुफिया एजेंसियां सभी पेशोपेश में फंसी हुई हैं।
वहीं इस आंदोलन को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों में हड़कंप मचा हुआ है। इसका जो कारण बताया जाता है उसके अनुसार कई नेता सवर्ण समाज की बदौलत ही जीत दर्ज कराते हैं, लेकिन अब इस स्थिति में उनकी चुनावी जीत फंसती हुई दिख रही है।
जगह जगह बैनर
इससे पहले मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों, गांवों और मोहल्लों में लोगों ने अपने घरों के बाहर बैनर लगाना शुरू कर दिया है जिसमे लिखा है कि हम सामान्य, पिछड़ा वर्ग के हैं, नेता हमारे यहां वोट मांगने न आएं।
इस बहाने जारी किया अलर्ट...
वहीं एससीएसटी एक्ट संशोधन के बीच सीधी जिले की चुरहट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रथ पर पथराव के बाद सरकार की चिंता बढ़ गई।
जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर कथित भारत बंद को लेकर पुलिस मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया है।
ये बोली पुलिस...
वहीं इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने बताया कि एक्ट में संशोधन को लेकर सवर्ण समाज का विरोध अब तक मंदसौर, नीमच, ग्वालियर जैसे कुछ शहरों में रैली के रूप में हुआ है।
प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग में विरोध के स्वर तीखे बताए जा रहे हैं। वहीं, कटनी, सतना, जबलपुर, रीवा, विदिशा, हरदा, बदनावर, सागर, टीकमगढ़, मंडला, श्योपुर जैसे जिलों में भी एट्रोसिटी एक्ट संशोधन को लेकर नाराजगी स्वरूप विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
आंदोलन ने पकड़ी गति...
वहीं इस आंदोलन में सवर्ण समाज के मुखर होकर सामने आने से भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में घबड़ाहट बढ़ गई है। दरअसल, पिछले 4-5 दिन में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ आंदोलन में गति पकड़ ली है। मप्र के 25से ज्यादा जिलों में आंदोलन फेल चुका है।
वहीं सूत्रों के अनुसार राज्य मंत्रालय में बैठकर सपाक्स और अपाक्स जैसे संगठन चलाने वाले आईएएस अधिकारी भी इस आंदोलन को अपने-अपने स्तर पर हवा दे रहे हैं। सपाक्स ने कई जिलों में 6 सितंबर को बंद का आह्वान किया है।
देउस्कर का कहना है कि कई संगठनों ने भारत बंद का आव्हान किया गया है जो केवल सोशल मीडिया पर चल रहा है। होशंगाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर इक्का-दुक्का संगठनों ने बंद की सूचना प्रशासन को दी है।
अभी इंटरनेट निलंबन जैसी आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है। फिर भी जिलों को जन्माष्टमी के दौरान उपलब्ध कराई गई पुलिस फोर्स को वापस नहीं लिया गया है। वे भारत बंद में कानून व्यवस्था के लिए उपयोग कर सकते हैं।