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एक गलती से मिल गई सौरभ शर्मा को जमानत, कार में मिला था 52 किलो सोना, 11 करोड़ कैश

ED Annual Report : RTO के पूर्व आरक्षक और धनकुबैर सौरभ शर्मा केस को लेकर ईडी की सालाना रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। लोकायुक्त की गलती से आरोपी को डिफाल्ट जमानत मिली थी।

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ED Annual Report

लोकायुक्त की गलती से मिली थी सौरभ शर्मा को डिफाल्ट जमानत (Photo Source- Patrika)

ED Annual Report :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की कथित काली कमाई के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया कि, लोकायुक्त पुलिस ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके चलते आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिली थी। ईडी की सालाना लीगल रिपोर्ट में उल्लेख किया कि, भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई के बावजूद समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण सौरभ शर्मा को 1 अप्रैल को डिफॉल्ट जमानत मिली थी। हालांकि, ईडी की सख्त जांच के चलते वो जेल से बाहर नहीं आ सका। बाद में हाईकोर्ट ने भी ईडी की कार्रवाई के खिलाफ दायर उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

बता दें कि, रिपोर्ट में कहा गया है कि, सौरभ शर्मा ने भोपाल स्थित ईडी कार्यालय में साल 2024 में दर्ज ईसीआईआर के संबंध में बीएनएसएस की धारा 483 और पीएमएलए 2002 की धारा 3 और 4 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। वो 10 फरवरी 2025 से हिरासत में है।

ईडी के खुलासे ने जांच प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल

ईडी के इस खुलासे ने न सिर्फ मामले की जांच पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ये संकेत भी दिये हैं कि, समयबद्ध कार्रवाई में चूक किस तरह आरोपियों को कानूनी राहत दिला सकती है।

ईडी की रिपोर्ट में सोरभ की आपराधिक आय 108 करोड़

अपनी वार्षिक लीगल रिपोर्ट में ईडी ने ये भी खुलासा किया कि, जमानत के लिए आवेदन करने वाले सौरभ शर्मा ने शैल कंपनियों, असुरक्षित ऋणों और वित्तीय लेनदेन का इस्तेमाल कर करीब 108 करोड़ रुपए की अपराधिक आय की है। यही नहीं, आरोपी ने इनकम के सोर्स छिपाकर रकम को इधर-उधर भी किया है।

कोर्ट ने खारिज की सौरभ की जमानत याचिका

मामले में जमानत आवेदन को लेकर मुद्दा ये था कि, क्या सौरभ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत दर्ज अपराध के मामले में नियमित जमानत पाने का हकदार है ? इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 सितंबर 2025 को सौरभ शर्मा बनाम प्रवर्तन निदेशालय पर फैसला सुनाते हुए सौरभ शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश में कहा कि, सौरभ शर्मा पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।

दंडनीय अपराध पर सौरभ ने मांगी थी नियमित जमानत

रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज ECIR 2024 के संबंध में नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। ये मामला PMLA, 2002 की धारा 3 और 4 में दंडनीय अपराधों से जुड़ा है।

ED ने सालाना रिपोर्ट में कहा

ईडी ने अपनी लीगल सालाना रिपोर्ट में कहा है कि सौरभ शर्मा के विरुद्ध ECIR विशेष प्रवर्तन प्राधिकरण लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) और 13(1)(B) में दर्ज एफआईआर के बाद रजिस्टर की गई थी, जिसमें अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था।

पिछले साल मिल गई थी जमानत

ईडी की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, जांच एजेंसी लोकायुक्त पुलिस द्वारा तय समय सीमा पर आरोप-पत्र दाखिल न कर पाने के कारण सौरभ शर्मा को 1 अप्रेल 2025 को मूल अपराध में डिफाल्ट जमानत दी थी। यहां अदालत ने पाया कि, ईडी के रिकॉर्ड पर रखे गए साक्ष्य और सह-आरोपियों के बयानों से पता चलता है कि, सौरभ शर्मा ने फर्जी संस्थाओं और बिचौलियों का एक नेटवर्क बना रखा था।

बड़े पैमाने पर धन का हेरफेर

इनके साथ मिलकर उसने ऋणों, फर्जी कंपनियों और पारिवारिक खातों के माध्यम से धन का बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ था। सौरभ ने व्यक्तिगत रूप से संचालन का प्रबंधन किया था, जिससे आपराधिक इरादे और सक्रिय संलिप्तता साबित होती है और अपराध की आय और धन-वसूली के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यहां की गई कोई भी टिप्पणी केवल जमानत आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य से है और याचिकाकर्ता यानी आरोपी सौरभ के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामले की खूबियों पर कोई राय नहीं मानी जाएगी। इस आधार पर अदालत ने माना कि ईडी ने पीएमएलए की धारा 45 की दोनों शर्तों का अनिवार्य रूप से पालन किया है और अदालत ने जमानत आवेदन खारिज कर दिया।

जाने पूरा मामला

लोकायुक्त पुलिस ने 17 दिसम्बर 2024 को आरटीओ के पूर्व आरक्षक शर्मा के अरेरा कालोनी स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपए की नकदी और अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए थे। फिर 18 और 19 दिसंबर की दरमियानी रात राजधानी के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार में 51.8 किलो गोल्ड और 11 करोड़ कैश बरामद हुआ था। इसे आयकर विभाग ने जब्त किया था। इसके बाद ईडी ने लोकायुक्त पुलिस की एफआईआर पर केस दर्ज कर सौरभ शर्मा और उसके साथियों चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल को गिरफ्तार किया था। ईडी ने सौरभ शर्मा की 108 करोड़ की नकद और अचल संपत्ति जब्त कर उसे अपराधिक आय से अर्जित आमदनी ठहराया था।