
भोपाल। प्रदेश के बाधों से अब पर्यटकों को आकर्षित करने करने की तैयारी की जा रही है। यहां क्रूज, वोट क्लब सहित अन्य पर्यटकों के मनोरंजन के अलावा उन्हें भोजन और ठहरने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। पहले चरण में ओंकारेश्वर, मंडलेश्वर, इंद्रिरा सागर, गांधी सागर, बारगी,तवा बाणसागर केन नदी के आस-पास की जाएगी। इन पर सरकार दो सौ करोड़ के आस पास राशि खर्च करेगी। पर्यटकों को तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम पीपीपी मोड पर किया जाएगा
प्रदेश में करीब 25 बड़े बांध हैं। इन बाधों से सिंचाई, पीने के पानी के अलावा इन क्षेत्रों को सरकार पर्यटन के रूप में तैयार करेंगी। जिससे बाहर के लोग वहां क्रूज, वोट, और तमाम तरह की जल क्रीड़ाएं कर सकेंगे। इससे जहां लाखों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं प्रदेश के लिए पर्यटन की बड़ी संभावनाएं निकलकर सामने आएंगी। क्योंकि महानगरों के लोग नदियों और बड़े-बड़े बाधों में लबालब भरे पानी को करीब से देखना ज्यादा पसंद करते हैं। अगर जल के साथ उन्हें वहां ठहरने, मनोरंजन, एडवेंचर, क्रूज, वोटिंग, भ्रमण जैसी सुविधाएं मिलेंगी तो पर्यटक ज्यादा आकर्षित होंगे।
पहुंच मार्ग और सुरक्षा पर फोकस
मुख्य मार्गो से बाधों तक के लिए पहुंच मार्ग तैयार करने पर फोकस किया जाएगा। वर्तमान में जो सड़कें हैं उनका चौड़ीकरण, सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटन क्षेत्रों में विकास कार्य करने का काम सरकार करेंगी और वहां सुविधाएं देने का काम गांव की समतियां करेंगी। स्थानीय पुलिस और ग्राम सुरक्षा समितियां पर्यटकों को सुरक्षा और सहायता उपलब्ध करने का काम करेंगी। समितियों के पास गोताखोर और तैराक भी होंगे, जिससे वे आपदा आने पर लोगों को पानी से बाहर निकाल सकें।
पयर्टन क्षेत्रों पर चार से पांच सौ करोड़ खर्च
पिछले चार से पांच सालों के अंदर तमाम पर्यटन परिपथों पर पांच सौ करोड़ के करीब राशि खर्च किए जा रहे हैं। इस राशि से पर्यटकों की सुविधाओं का विकास, पर्यटन क्षेत्रों में सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तैयार करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए धार्मिक, बौद्ध, वन्य जीव, ऐतिहासिक, विरासत परिपथ बनाए गए हैं।
कमजोर पहुंचमार्ग से कतराते हैं पर्यटकों
प्रदेश टाइगर, धार्मिक, विरासत, पानी, नदी सहित कई मामलों में पहले नम्बर पर है, लेकिन कमजोर पहुंच मार्ग से पर्यटक मप्र को अपनी प्राथमिकता में सातवें और आठवें नम्बर पर रखते है। ग्वालियर, खजुराहो को छोड़ दिया जाए तो किसी भी पर्यटन स्थल पर सीधे रेल और एयर कनेक्टिविटी नहीं हैं। आज का पर्यटक सड़क मार्ग से पर्यटन स्थल तक पहुंच कर अपना कीमती समय बेकार नहीं करना चाहता है। इसी का नतीजा है कि देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने में हम सातवें स्थान पर रहते हैं।
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तीन वर्ष में आए पर्यटकों की संख्या
राज्य -------वर्ष 2018-------------------वर्ष 2019-----------------वर्ष 2020
-------देशी -----------विदेशी--------देशी ------- विदेशी----------देशी -------विदेशी
मप्र -----83969799 -----375476 ----88707139----327958 -----23519632----99819
पर्यटन के मामले में टाप पांच राज्य
राज्य ---------वर्ष 2018-----------------वर्ष 2019------------------वर्ष 2020
-------देशी -----------विदेशी--------देशी ------- विदेशी----------देशी -------विदेशी
तमिलनाडु--385909376-- 6074345-- 494865257-- 6866327-- 140651241-- 1228323
महाराष्ट्र---119191539 ---5078514 --149294703 ---5528704--- 39234591---1262409
उत्तर प्रदेश-- 285079848--- 3780752-- 535855162--- 4745181-- 86122293--- 890932
दिल्ली ----29114423 ----2740502--- 36467598 ---2983436---- 9583671---- 681230
राजस्थान --50235643--- 1754348---- 52220431 ----1605560---- 15117239 ---446457