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एमपी के गांवों तक पहुंची कैंसर की जड़ें, हृदय रोगियों ने भी बढ़ाई चिंता

Cancer Cases : जमापूंजी खत्म होने के बाद 10 महीने में कैंसर पीड़ित 2 हजार मरीजों ने मुख्यमंत्री से मदद मांगी। सरकार से मदद न मांगने वाले मरीजों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।
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Cancer Cases

एमपी में कैंसर और हृदय रोगियों ने बढ़ाई चिंता (फोटो सोर्स: AI Generated)

MP News :मध्य प्रदेश में कैंसर घर कर चुका है। मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। हालात ये हैं कि, अकेले 10 महीने में ही यहां 2 हजार से अधिक मरीज सामने आए हैं। ये वे मरीज है, जिन्होंने इलाज पर खुद की जमा पूंजी खर्च कर दी। तब भी कैंसर से छुटकारा नहीं मिला तो आगे के इलाज के लिए मुख्यमंत्री से मदद मांगी। इसके अलावा सरकार से मदद न मांगने वाले मरीजों की संख्या भी इससे कई गुना अधिक है।

उधर हृदय रोगी भी तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि कैंसर और हृदय रोगों का शिकार ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी होने लगे हैं। जबकि, गांवों का वातावरण अच्छा और खान-पान शहरों की तुलना में अधिक शुद्ध माना जाता है। तब भी गांवों में गंभीर बीमारियों का बढ़ना खतरे की घंटी है।

सड़क दुर्घटना रोकने में सफल नहीं

उधर सड़क दुर्घटना रोकने के तमाम प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं, लोग बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उक्त अवधि में 1500 मरीज अस्पतालों में पहुंचे। इनमें से कई की हालत बहुत ही गंभीर हो गई। कुछ जिंदगी से हाथ धो बैठे। मुख्यमंत्री राज्य बीमारी सहायता कोष से इनके इलाज में मदद दी गई।

ऐसे मरीजों को भी कैंसर

कैंसर के कई मरीजों की हिस्ट्री चौकाने वाली सामने आ रही है। ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने तंबाकू, शराब और किसी भी तरह के नशे नहीं किए। बैतूल के ल…कडज़ाम में मट्टो बाई की मौत कैंसर हुई। उनके पति रामचरण यादव बताते हैं कि उनकी पत्नी ने कभी तंबाकू को छुआ तक नहीं, लेकिन 60 साल की उम्र के पहले ही पेट में आंतों के कैंसर का शिकार हुईं और इलाज के दौरान जान चली गई।

गांवों में भी तेजी से बढ़ने लगे कैंसर और हृदयरोगी

गांवों में भी कैंसर व हृदय संबंधी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। पूर्व के वर्षों में कई ऐसे गांव थे, जहां लोगों को हृदय संबंधी दि…कत ही नहीं होती थी, लेकिन बीते 10 वर्षों में तेजी से ऐसे मरीजों की संव्या बढ़ी है। चिकित्सा क्षेत्रों के जानकार एवं पूर्व सर्जन डॉ. आरके बड़वे का कहना है कि, ग्रामीण क्षेत्रों से कई तरह के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं, जो शोध का विषय हो सकता है। गांवों का वातावरण शहरों की तुलना में काफी हद तक बेहतर माना जाता रहा है। ऐसे में मरीजों की संख्या में बढ़ना कई चिंता पैदा करती है।

कब कितने मरीजों को मदद

वर्ष--------------मरीज---------------मदद मिली-------------मिली राशि

2023-24--67736---38968----1918004589
2024-25-------57196-----------34829---------------1972590029
2025-26---------63756--------------38877--------------2994018928
2026-27----------17823--------------9432-----------------526972827
(नोट: 2026-27 में आंकड़े 16 जुलाई तक।)

इन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों ने मांगी मदद

बीमारी--------------मरीज

-मेडिकल मैनेजमेंट---5642
-जनरल सर्जरी---4356
-आर्थो सर्जरी---2164
-कैंसर---2021
-दुर्घटना---1500
-पीडियाट्रिक---1040
-हृदय रोग---734
-नैनो सर्जरी----676
-आई सर्जरी---543
-ट्रांसप्लांट, टायलिसिस---285
-ईएनटी---110
-थैलेसिमिया---85
-आग से सुलझे---47
-बीएमटी-सी---30

नोट: ये मरीज वर्ष 2025 व 2026 में केवल 10 महीने की अवधि में मदद मांगने पहुंचे थे, जिन्हें मदद भी उपलब्ध कराई गई।