भोपाल

गोदाम का ताला तोड़कर जब्त किया 50 क्विंटल चावल, व्यापारी-ठेकेदार गायब

1480 क्विंटल गेहूं की प्रारंभिक जांच में सामने आई गड़बड़ी, कलेक्टर ने रिकवरी के लिए नागरिक आपूर्ति निगम को लिखा पत्र।

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Dec 07, 2017

भोपाल। गरीबों के गेहूं की कालाबाजारी पकड़ में आने के बाद रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब मंडी में सरकारी चावल की कालाबाजारी का मामला पकड़ा गया है। अधिकारियों ने बुधवार को मंडी में एमएस टे्रडर्स के गोदाम का ताला तोड़ा, तो लगभग 50 क्विंटल सरकारी चावल मिला।

इस कालाबाजारी की चैन में शामिल लोग फिलहाल गायब हैं। इनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995 के तहत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी गई है। कालाबाजारी करने वालों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। इस संबंध में कलेक्टर ने मप्र नागरिक आपूर्ति निगम को पत्र लिखा है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 1480 क्विंटल गेहूं की कालाबाजारी होना सामने आया है। इसकी कीमत 31 लाख रुपए के आसपास है। अधिकारिक जानकारों ने बताया कि इस राशि की वसूली उन लोगों से की जाएगी, जो इस रैकेट में शामिल हैं।

कर्मचारियों की भूमिका पर संदेह
मंडी में सरकारी गेहूं-चावल कैसे पहुंचा? जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि गेट पर तैनात इंद्रमणि द्विवेदी और विनोद भार्गव ने प्रवेश पर्ची जारी करते समय यह तस्दीक नहीं की कि गेहूं व चावल कौन सा है। इससे इन कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा होता है।

नियमानुसार मंडी में किसान द्वारा लाया गया अनाज (कच्ची आवक) पर मंडी के गेट पर किसान का नाम, गांव एवं वाहन क्रमांक लिखा जाता है। जबकि, व्यापारी द्वारा लाए गए अनाज पर अनुज्ञा या बिल आदि देना पड़ता है। इसका उल्लेख अलग रजिस्टर में करना होता है। प्रारंभिक जांच में विक्की टे्रडर्स के संचालक अयाज अली, मेसर्स सिमरन फूड्स के संचालक रवि आहूजा, मेसर्स अमन टे्रडर्स के अरविंद साहू, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के ट्रांसपोर्टर खालिद खान और जामिया इस्लामिया अरबिया मस्जिद तर्जुमेवाली के सचिव माजिद खान के खिलाफ खाद्य अधिनियम ३/७ के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

बोरियों पर अलग-अलग जिलों के टैग
जांच अधिकारियों को एमएस टे्रडर्स गोदाम में एक जगह चावलों का ढेर लगा मिला। एक कोने में चावल की खाली बोरियां मिलीं। इनपर जबलपुर, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट आदि जिलों के टैग लगे हुए थे। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी ज्योतिशाह नरवरिया का कहना है कि इससे प्रतीत होता है कि यह चावल रेलवे रैक से भोपाल लाया गया हो।

मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन प्रबंध संचालक विकास नरवाल ने कहा कि पूरे रैकेट का पता लगाया जा रहा है] जो लोग इस कालाबाजारी में दोषी पाए जाएंगे, उनसे नुकसान की भरपाई करवाई जाएगी। मप्र मंडी बोर्ड प्रबंध संचालक फैज अहमद किदवई ने कहा कि मंडियों के गेट पर आने वाले अनाज के रिकॉर्ड के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि आगे से किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सके।

Published on:
07 Dec 2017 11:24 am
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