भोपाल

Breast Cancer : ब्रेस्ट कैंसर के लिए किया जा रहा बड़ा रिसर्च, AIIMS को सरकार ने दिए 1 करोड़ रुपए

Breast Cancer : ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को यह पीड़ा नहीं झेलनी होगी। एम्स भोपाल ने एक विशेष प्रिंटर तैयार किया है।

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May 16, 2024

Breast Cancer : संतनगर की 38 वर्षीय रेनू 6 माह से ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करा रहीं हैं। 6 माह में इनके इलाज के तरीके को 6 बार बदला गया। अब डॉक्टरों ने सर्जरी कर ब्रेस्ट को निकालने की बात कही है। यह एक महिला की कहानी नहीं है। लेकिन, अब ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को यह पीड़ा नहीं झेलनी होगी। एम्स भोपाल ने एक विशेष प्रिंटर तैयार किया है। जिसके जरिए कैंसर ग्रसित हिस्से का 3डी मॉडल तैयार होगा।

हर मरीज को उसके अनुकूल उपचार

ब्रेस्ट कैंसर के मामले में भोपाल देश में 8 वें नंबर पर है। एम्स के जैव रसायन विभाग के प्रमुख डॉ.जगत कंवर के अनुसार पांच महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं तो जरूरी नहीं उनका इलाज में एक ही तरह से हो। क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। कई बार एक दवा जो एक मरीज में कारगर है वही दूसरे में असर नहीं करती। इसी को देखते हुए स्तन कैंसर पर शोध चल रहा है। इस शोध के बाद ब्रेस्ट कैंसर में किस के लिए कौन सी दवा बेहतर है।

ऐसे होगा शोध

एम्स में पॉलीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर है। यह प्रिंटर शरीर के अंग की ही तरह नकली अंग तैयार करता है। इसमें मरीज के ब्लड ग्रुप समेत अन्य सेल्स डाले जाते हैं। शोध के दौरान 10 ब्रेस्ट कैंसर पीड़ितों के नकली कैंसर ग्रसित स्तन बनाए जाएंगे। जिस पर अलग-अलग दवाएं देकर शोध किया जाएगा।

ये कर रहे रिसर्च

एम्स, भोपाल को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा स्थापित जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद से लगभग एक करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। एस के ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग की डॉ. नेहा आर्य अनुदान की प्रमुख अन्वेषक हैं।

सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट कैंसर के

इंडियन काउंसलिंग ऑफ मेडिकल रिसर्च के कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के मामले 2.3 फीसदी बढ़ गए हैं। जिसके साथ महिलाओं में कुल कैंसर में से सबसे अधिक 33.9 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने आ रहे हैं। इसके बाद 12.1 फीसदी मामले सर्विक्स कैंसर और 7.9 फीसदी ओवरी कैंसर के हैं। उपचार में सबसे बेहतर होगा, वही मरीज को मिलेगा।

इससे होंगे यह लाभ

● बेवजह दवा नहीं खानी पड़ेगी।
● पशु परीक्षण पर निर्भरता को कम होगी
● मरीज में इलाज के दौरान साइडइफेक्ट कम होंगे

प्रयोगशाला में विकसित 3डी ब्रेस्ट दवा परीक्षण प्रोटोकॉल में क्रांति लाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा प्रयास है कि हर मरीज को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए।- डॉ. अजय सिंह, कार्यपालक निदेशक, एस भोपाल

Published on:
16 May 2024 12:16 pm
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