शहर की सड़कों और गलियों को रोशन करने का जिम्मा दो निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
भोपाल. स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन 'स्मार्ट लाइट स्कीमÓ के तहत शहर के मुख्य मार्गों से लेकर कुछ पॉश एरिया की 20 हजार लाइट्स एचपीएल कंपनी के हवाले करेगा। दावा है कि 12 हजार लाइट्स लग चुकी हैं। दो माह में बाकी भी लग जाएंगी। इनको बंद-चालू करने, मेंटेनेंस, बिलिंग और अन्य काम एचपीएल ही करेगी।
नगरीय प्रशासन विभाग बची 40 हजार स्ट्रीट लाइट्स के लिए रेवेन्यू शेयरिंग के आधार पर एजेंसी तय करेगा।
बारिश के बाद कॉलोनी-मोहल्लों की लाइट्स का जिम्मा एक अन्य निजी कंपनी के हाथ में होगा। इसमें निगम कंपनी को रेवेन्यू शेयरिंग के आधार पर बिजली बिल का भुगतान करेगा। यानी अब तक जितना बिजली बिल आता है, वह राशि निगम कंपनी को देगा। कंपनी एलइडी लगाकर इसी बिल में से कमाई और मेंटेनेंस करेगी। नगर निगम की विद्युत शाखा इस जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी। इसके बाद वह एक मॉनीटरिंग एजेंसी के तौर पर काम करेगी। इस व्यवस्था से निगम को सालाना करीब 30 करोड़ रुपए की बचत की उम्मीद है।
ये है आशंका: निगम बिल की फिक्स राशि का भुगतान कंपनी को करेगा। बिल कम आएगा तो कंपनी को बचत होगी। ऐसे में वह शहर के कई क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट बंद रखकर अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। लोगों को बेवजह अंधेरे में रहना पड़ सकता है।
ये होगा लाभ: अभी निगम की विद्युत शाखा के पास अमला बेहद कम है। दो निजी एजेंसियां आने से यह समस्या दूर हो जाएगी। एकीकृत कॉल सेंटर पर शिकायत का तत्काल निराकरण होगा। लाइट्स बंद रहने पर निजी एजेंसी पर पैनाल्टी लगेगी, जिससे बेहतर काम होने की उम्मीद है।
ये सड़कें अंधेरे में: होशंगाबाद रोड से बावडिय़ाकलां और रोहित नगर चौराहा से कलियासोत के आगे तक की सीपीए की रोड।
शक्तिनगर, साकेत नगर से एम्स तक स्ट्रीट लाइट बंद।
जेल पहाड़ी रोड पर भी बंद।
राजाभोज सेतु की लाइट्स बंद।
स्नेह नगर, श्रीराम कॉलोनी, मिसरोद तक व बागसेवनियां, बागमुगालिया, कटारा हिल्स क्षेत्र की स्ट्रीट लाइट्स अक्सर बंद।
20 हजार स्ट्रीट लाइट्स का जिम्मा निजी एजेंसी को पीपीपी के आधार पर दिया है। बाकी का जिम्मा अन्य एजेंसी को देंगे। संजय कुमार, सीइओ, स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन