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MP News: भोपाल में युवाओं में बढ़ती नशे की लत, समाज और भविष्य के लिए गंभीर खतरा

MP News: स्कूल-कॉलेज के छात्र हों या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा-तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक दबाव और गलत संगत उन्हें नशे की ओर धकेल रही है।

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BHOPAL.

youth drug addiction rising crisis

MP News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अब एक चिंताजनक सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही है। स्कूल-कॉलेज के छात्र हों या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा-तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक दबाव और गलत संगत उन्हें नशे की ओर धकेल रही है। हेल्थ एक्सपर्ट का भी मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जानकारों के मुताबिक, नशे की शुरुआत अक्सर ट्राय करने की मानसिकता से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत निर्भरता में बदल जाती है। शराब, सिगरेट, गांजा से लेकर सिंथेटिक ड्रग्स तक की पहुंच अब पहले से ज्यादा आसान हो गई है। शहरभर में सक्रिय अवैध नेटवर्क माध्यमों के जरिए भी नशीले पदार्थों की सप्लाई बढ़ रही है, जो कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।

कारणों की परतें, स्वास्थ्य और समाज पर असर

युवाओं में बढ़ते अवसाद, करियर को लेकर असुरक्षा, परिवार में संवाद की कमी और सोशल मीडिया पर ग्लैमराइजेशन इस समस्या को हवा दे रहे हैं। कई मामलों में देखा गया है कि छात्र पढ़ाई के दबाव या असफलता के डर से नशे का सहारा लेते हैं। वहीं, कूल दिखने की चाह और साथियों का दबाव भी बड़ी वजह बनता है। नशे की लत का सीधा असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, याददाश्त कमजोर होना, व्यवहार में आक्रामकता, पढ़ाई में गिरावट, अपराध की ओर झुकाव और पारिवारिक संबंधों में दरार जैसे दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं, कई मामलों में युवा अपराध और हिंसा की घटनाओं में भी शामिल पाए जा रहे हैं।

साझा सामाजिक जिम्मेदारी का वक्त

मनोचिकित्सकों का भी मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं से जुड़ी हुई है। इसके समाधान के लिए सरकार, समाज, स्कूल, परिवार और स्वयं युवाओं—सभी को मिलकर काम करना होगा। यदि समय रहते जागरूकता, सख्ती और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाए गए, तो राजधानी के युवाओं को इस खतरे से बचाया जा सकता है और एक स्वस्थ, सुरक्षित समाज की नींव मजबूत की जा सकती है।

क्या हो सकते हैं समाधान?

जागरूकता और काउंसलिंग- स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में नियमित काउंसलिंग सत्र, हेल्थ एजुकेशन और इंटरएक्टिव वर्कशॉप जरूरी हैं, युवाओं को डराने के बजाय उन्हें वैज्ञानिक जानकारी और मानसिक सहारा देना ज्यादा प्रभावी होगा।

परिवार की सक्रिय भूमिका- अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उनके व्यवहार, दोस्तों के दायरे और दिनचर्या पर नजर रखना जरूरी है, समस्या दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ की मदद ली जानी चाहिए।

कानूनी सख्ती और निगरानी- पुलिस और प्रशासन को स्कूल-कॉलेज के आसपास विशेष निगरानी बढ़ानी होगी। नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई और नियमित अभियान चलाना जरूरी है।

सकारात्मक विकल्प और स्किल डेवलपमेंट- खेल, संगीत, थिएटर, योग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को स्वस्थ विकल्प दिए जा सकते हैं, साथ ही स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर बढ़ाने से भी उनका ध्यान सही दिशा में जाएगा।

डी-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन- जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके लिए शहर में पर्याप्त डी-एडिक्शन सेंटर और काउंसलिंग सुविधाएं होना जरूरी है, उन्हें अपराधी नहीं, बल्कि मरीज मानकर इलाज और पुनर्वास पर ध्यान देना होगा।

क्या है जनता की राय

  • आज के समय में युवाओं का नशे की ओर बढ़ता रुझान बेहद चिंताजनक है, यह केवल उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित कर रहा है, सबसे जरूरी है कि परिवार और समाज मिलकर समय रहते बच्चों को सही दिशा दें।राकेश शुक्ला, रहवासी
  • नशे की शुरुआत अक्सर दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत बन जाती है, हमें स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और काउंसलिंग की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है, ताकि युवा शुरुआत में ही इससे बच सकें।तीरथ पटेल, रहवासी
  • आजकल नशीले पदार्थों की उपलब्धता बहुत आसान हो गई है, जो सबसे बड़ी चिंता है। प्रशासन को इस पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए और अवैध कारोबार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।चंद्रमोहन दास, रहवासी
  • परिवार की भूमिका इस मुद्दे में सबसे अहम है, माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए, सही मार्गदर्शन ही युवाओं को इस दलदल से दूर रख सकता है।कमल तिवारी, रहवासी
  • युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें सकारात्मक विकल्प देना जरूरी है, खेल, फिटनेस और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उन्हें व्यस्त रखा जाए, तो वे गलत रास्ते पर जाने से बच सकते हैं।शिवम कुमार, रहवासी
  • जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके लिए पुनर्वास और इलाज की बेहतर सुविधाएं होनी चाहिए, उन्हें अपराधी नहीं, बल्कि मरीज समझकर समाज में वापस लाने की कोशिश करनी चाहिए।रामनिवास, रहवासी