हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट में लेटलतीफी की वजह से आवंटियों का सब्र अब टूटने लगा है। सोमवार को रिवेरा टाउनशीप के पास निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के आवंटियों ने अपर आयुक्त सीपी गोहल से कहा कि जब हम मकान की पूरी राशि जमा करा चुके हैं तो हमें रजिस्ट्री क्यों नहीं की जा रही।
भोपाल. हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट में लेटलतीफी की वजह से आवंटियों का सब्र अब टूटने लगा है। सोमवार को रिवेरा टाउनशीप के पास निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के आवंटियों ने अपर आयुक्त सीपी गोहल से मुलाकात कर कहा कि जब हम मकान की पूरी राशि जमा करा चुके हैं तो हमें रजिस्ट्री क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने शासन के नियमों के अनुसार मकानों को फ्री होल्ड करने की मांग भी की। ये चेतावनी भी दी कि यदि निगम ने जल्द ही रजिस्ट्री न हीं कराई तो सभी 228 आवंटियों को न्याय के लिए रेरा का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। गौरतलब है कि यहां एलआइजी श्रेणी के आवासों के लिए आवंटन हुआ है। बैंक लोन लेकर निगम को 22 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है, बावजूद इसके काम आधा अधूरा है। गोहल ने निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए भी काम शुरू करने का आश्वासन दिया। उन्होंने आवंटियों को रजिस्ट्री मामले में चर्चा करने के लिए राजस्व प्रभारी आलमगीर से मिलने की बात कही।
निर्माण गति पर पहले ध्यान नहीं दिया, अब महंगी पड़ रही
शहर में हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट के तहत करीब 33 हजार आवासों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए 2017-18 में ही काम शुरू हो गया था। तत्कालीन निगम के अफसरों ने यहां प्रोजेक्ट की गति को लेकर ध्यान नहीं दिया। स्थिति ये बनी कि ठेका एजेंसियों ने काम लेने के एक साल तक काम शुरू ही नहीं किया था। पवन सिंह के पहले कार्यकाल में उन्हें यहां जिम्मा दिया, इसके बाद दूसरे कार्यकाल में फिर इन्हें हाउसिंग फॉर ऑल का जिम्मा दिया। लेकिन गति पर असर नहीं हुआ। यहां रिटायर्ड होकर निगम में संविदा नियुक्ति पर काम कर रहे एआर पंवार को ही चीफ इंजीनियर बनाए रखा। स्थिति ये हैं कि जिन प्रोजेक्ट को एक साल पहले ही खत्म हो जाना चाहिए था, उनमें अभी 40 फीसदी तक काम हुआ है। निगमायुक्त चौधरी ने पंद्रह अगस्त तक कुछ हिनोतिया व कुछ प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा तय की है, लेकिन ये संभव नहीं लग रहा। सबसे खराब स्थिति में ओमनी कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे 12 नंबर, दुर्गानगर व श्यामनगर प्रोजेक्ट है।