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एमपी के 2500 से ज्यादा गांवों का बदलेगा नक्शा, अगले 15 साल की जरूरतों को देखते हुए बनेंगी बड़ी योजनाएं

Bhopal Metropolitan Area- गांवों में रहने वाले 30 लाख से ज्यादा लोगों को भविष्य में इसका बड़ा लाभ होगा।

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Bhopal Metropolitan Area - एमपी की मोहन सरकार ने भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने का जो सपना देखा था, वह जमीन पर उतरता दिख रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इंदौर के बाद भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को अधिसूचित करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें भोपाल सहित सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ और नर्मदापुरम का 12098 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल किया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में कुल 2510 गांव शामिल किए गए हैं। छह जिलों के इन गांवों का नक्शा ही बदल जाएगा। यहां अगले 15 साल की जरूरतों को देखते हुए विकास योजनाएं बनाई जाएंगी। गांवों में रहने वाले 30 लाख से ज्यादा लोगों को भविष्य में इसका बड़ा लाभ होगा। ये जिले उद्योग-धंधे, लोक परिवहन समेत अन्य क्षेत्रों में बेंगलूरू, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तर्ज पर उभरेंगे। विकास की बड़ी योजनाएं आकार लेंगी।

मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के नाम पर केंद्र से जनकल्याण व अद्योसंरचनात्मक विकास के लिए बड़ी राशि हासिल की जा सकेगी। दुनियाभर के वित्तीय संस्थानों से रियायती दरों पर आर्थिक मदद ली जा सकेंगी। महानगरों में सिमट चुके उद्योग-धंधों को यह क्षेत्र गति देगा। सड़कें बनेंगी। रोजगार के साथ ही स्वरोजगार के विकल्प भी खुलेंगे।

बता दें कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के विकास के लिए मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमआरडीए) बनाया जाएगा। इसकी मदद के लिए मेट्रोपॉलिटन योजना समिति (एमपीसी) भी बनाई जाएगी। मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को आधार बनाकर औद्योगिक कॉरिडोर, मेट्रो, लोकल ट्रेन, लोक परिवहन, सीवर नेटवर्क समेत अन्य क्षेत्र में अतिरिक्त बजट हासिल करने में मदद मिलेगी। निवेश बढ़ेगा, राज्य को समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी।

6 जिलों के विकास के लिए मास्टर प्लान के अलावा विशेष क्षेत्र विकास योजना भी बनेगी, जो 15 वर्ष की जरूरतों को देखते हुए बनाई जाएगी। जिलों को बड़े काम मिलेंगे, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। आम जनता आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्वरोजगार को गति मिलेगी। लोक परिवहन सेवाओं का विस्तार होगा। औद्योगिक कॉरिडोर व औद्योगिक क्षेत्रों के जमीन पर उतरने से जमीनों के दाम बढ़ेंगे।

मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में अब यह होगा

प्राधिकरण बनेगा: नगर विकास प्राधिकरण सीमाओं के बाहर शेष क्षेत्र में नियोजन व विकास के काम मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमआरडीए) द्वारा किए जाएंगे। ऐसे प्रोजेक्ट जो एक से अधिक विकास प्राधिकरण की सीमा क्षेत्र में विकसित किया जाना प्रस्तावित होंगे, विकास के कार्य मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा किए जाएंगे।

सरकार तय करेगी अध्यक्ष: एमपीसी में नगर पालिकाओं, पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि व एमआरडीए के प्रतिनिधि होंगे। एमपीसी में एक अध्यक्ष व दो उपाध्यक्ष होंगे। नियुक्ति निगम-मंडलों की तर्ज पर होगी। दो तिहाई सदस्य क्षेत्र में आने वाली नगर पालिकाओं व पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों में से चुनाव के जरिए चुने जाएंगे। केंद्र-राज्य सरकार, संस्थाओं, संगठनों के प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे। क्षेत्र में आने वाले लोकसभा व विधानसभा क्षेत्र के सदस्य, संबंधित नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगम के महापौर विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। एमपीसी मेट्रोपॉलिटन विकास एवं नवेश की योजना का प्रारूप तैयारी करेगी।

सीएम होंगे अध्यक्ष: मुख्यमंत्री एमआरडीए के अध्यक्ष होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व राजस्व विभाग के मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव और नगरीय विकास, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, पर्यावरण व पंचायत विभाग के एसीएस, पीएस सदस्य होंगे। महानगरीय योजना समिति के प्रतिनिधि सहित अन्य को शामिल किया जाएगा।

जिला- तहसीलें- क्षेत्रफल

भोपाल- हुजूर, बैरसिया व कोलार- 2275
नर्मदापुरम- डोलरिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखननगर, नर्मदापुरम- 480
सीहोर- आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, रेहटी व सीहोर-3302
रायसेन- गोहरगंज, रायसेन व सुल्तानपुर- 2812
राजगढ़- ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर और सुठालिया- 2422
विदिशा- गुलाबगंज और विदिशा- 804