क्राइम ब्रांच में वर्षों से रखी लावारिस संपत्ति की नीलामी की जाएगी। इसमें सोना-चांदी के गहनों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन तक शामिल है। कोर्ट ने नीलामी के आदेश दिए हैं।
भोपाल. क्राइम ब्रांच में वर्षों से रखी लावारिस संपत्ति की नीलामी की जाएगी। इसमें सोना-चांदी के गहनों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन तक शामिल है। कोर्ट ने नीलामी के आदेश दिए हैं। इन्हें लावारिस संपत्ति की श्रेणी में रखते हुए नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। आम आदमी को इन संपत्तियों पर दावा करने सात दिन का समय दिया है।
क्राइम ब्रांच में वर्षों से लावारिस संपत्ति रखी हुई है। इसके निराकरण के लिए जिला न्यायालय भोपाल न्यायालय जेएमएफसी शरद जायसवाल ने आदेश जारी किया है। इसमें करीब 52 वाहन, 56 सोने-चांदी के गहने और 106 नग मोबाइल सहित मूल्यहीन वस्तुएं शामिल हैं, जो वर्षों से मालखानों में रखी हुई हैं।
तीन प्रकार की संपत्ति होगी नीलाम
वाहन: 21 प्रकरण में बाइक, स्कूटी, ट्रक, कार सहित करीब 52 वाहनों का निराकरण किया जाएगा। इनका मूल्य निर्धारण पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जाएगा।
मूल्यवान संपत्ति: 3 प्रकरण में सोने-चांदी के 56 जेवरात शामिल हैं। इनका वजन और टंच कराकर रजिस्टर्ड सुनारों से मूल्य निर्धारण कराए जाने के बाद इनकी नीलामी की राशि तय की जाएगी।
मूल्यहीन संपत्ति: 15 प्रकरण में 106 नग टीवी, मोबाइल, लैपटॉप सहित अन्य इलेक्ट्रांनिक सामान हैं। इनमें चलने योग्य सामानों की मूल्य का निर्धारण पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जाएगा और खराब हो चुकी सामाग्री का ईवेस्ट द्वारा निस्तारण किया जाएगा।
क्राइम ब्रांच में वर्षों से रखी लावारिस संपत्ति की नीलामी किए जाने से पहले आमजन को जानकारी देने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लिस्ट चस्पा की जा रही है। इसका मकसद लोग उक्त संपत्ति को पहचानें और खुद की संपत्ति होने पर 7 दिन के अंदर दस्तावेज के साथ अपना दावा पेश कर सकते हैं। इन संपत्तियों के निराकरण के लिए इस्तगासा पेश किए गए थे, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर यह आदेश दिए हैं।
न्यायालय द्वारा जब्त सामग्री मोबाइल फोन और लैपटॉप के मालिकों के नहीं मिलने पर उक्त संपत्ति का निराकरण करने के लिए इसकी जानकारी आमजन तक पहुंचाने का आदेश दिया है। इन संपत्तियों के मालिक नहीं मिलने पर 24 अगस्त के बाद इनकी नीलामी की जाएगी और इससे मिलने वाला राजस्व राज्य सरकार के खजाने में जमा किया जाएगा।
शहर के अन्य थानों में वर्षों से पड़ी सामग्री का निस्तारण किया जाता है, तो उससे मिलने वाली लाखों रुपए की राशि राज्य सरकार के खजाने में जाएगी। साथ ही वर्षों से पड़ी सामग्री हटने से थानों के मालखाने में सामान रखने के लिए जगह मिल सकेगी।